चीनी मोबाइल कंपनी शाओमी इंडिया ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से 5551.27 करोड़ रुपये जब्त किए जाने पर सवाल उठाए हैं. कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा कि उसने कार्रवाई के ख़िलाफ़ जो तथ्य और क़ानूनी तर्क रखे उन्हें बिल्कुल नहीं सुना गया, जिससे वो निराश है.
दरअसल, ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत शाओमी इंडिया के 5551.27 करोड़ रुपये के डिपॉजिट जब्त करने के आदेश जारी किए थे. यह भारत में इस तरह की सबसे बड़ी जब्ती की कार्रवाई है.
शाओमी इंडिया पर अनाधिकृत तरीके से भारत से बाहर विदेशी करेंसी भेजने का आरोप है और रॉयलिटी के नाम पर विदेशों में पैसा भेजना गैरक़ानूनी और फेमा कानून का उल्लंघन है.
कंपनी ने कहा कि उसने स्मार्टफ़ोन बनाने में आईपी लाइसेंस के लिए अमेरिका के क्वॉलकॉम ग्रुप से एक कानूनी समझौता किया था और दोनों कंपनियों को लगता है कि क्वालकॉम को रॉयलिटी कै पैसा देने के लिए शाओमी इंडिया की ओर से किया गया ये करार वैध है.
कंपनी ने किया ये दावा
कंपनी ने दावा किया कि जो 5551.27 करोड़ रुपये शाओमी इंडिया ने विदेशी कंपनियों को दिए उनमें से 84 फ़ीसदी पैसा क्वालकॉम को दी जानी वाली रॉयलिटी का है.
क्वालकॉम अमेरिका में लिस्टेड एक थर्ड पार्टी कंपनी है जो भारत में स्मार्टफोन्स के लिए इस्तेमाल होने वाली आईपी और स्टैंडर्ड इसेंशियल पेटेंट्स (एसईपी) जैसी लाइसेंस वाली तकनीकें शामिल हैं.
शाओमी इंडिया ने यह भी कहा कि उसने जो भी लेन-देन किया है वो सब आरबीआई की ओर से निर्धारित मानकों और माध्यमों से ही हुआ है और पूरी तरह वैध है.
ईडी की कार्रवाई पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) की भी स्वीकृति मिल गई थी. इस पर शाओमी इंडिया ने कहा, ‘‘हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेडकी भारत से बाहर कोई भी संपत्ति नहीं है. इसलिए जैसा कि हमारी समझ में आता है, इस स्थिति में फेमा का सेक्शन 4 अप्लाई नहीं होता.’’
शाओमी इंडिया ने कहा कि वो इस पूरे मुद्दे को सुलझाने और कंपनी के मूल्यों को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है.
-एजेंसी