महिला आयोग का सख्त फरमान: स्कूलों में मोबाइल से पढ़ाई और होमवर्क पर लगे रोक, भेजे जाएंगे नोटिस

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आगरा/लखनऊ। गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने प्रदेश के स्कूलों को चेतावनी दी है। आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने गुरुवार को आगरा जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान कहा कि अब समय आ गया है जब बच्चों को मोबाइल फोन के ‘डिजिटल पिंजरे’ से बाहर निकालकर वापस किताबों की दुनिया में लाया जाए।

ऑनलाइन पढ़ाई अब मजबूरी नहीं, मानसिक खतरा

आयोग अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना काल की मजबूरी को अब स्कूलों ने फैशन और सुविधा बना लिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “मोबाइल के जरिए होमवर्क भेजना और ऑनलाइन क्लासेस बच्चों में मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने इसे गाजियाबाद की दुखद घटना का एक बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण बताया।

पूरे प्रदेश के स्कूलों को जाएंगे नोटिस

महिला आयोग अब इस मामले में कानूनी और प्रशासनिक दखल देने जा रहा है। बबीता चौहान ने घोषणा की कि जल्द ही प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को पत्र और नोटिस जारी किए जाएंगे। इन निर्देशों में स्पष्ट किया जाएगा कि होमवर्क और पढ़ाई के लिए मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर वैकल्पिक और सुरक्षित माध्यम अपनाए जाएं। आयोग का मानना है कि क्लासरूम और किताबों का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

अभिभावकों से संवाद की अपील

अध्यक्ष ने केवल स्कूलों को ही नहीं, बल्कि अभिभावकों को भी उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के साथ नियमित संवाद (Interaction) करें और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर पैनी नजर रखें। बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर उन्हें सामाजिक और मानसिक रूप से स्वस्थ वातावरण देना समाज की साझा जिम्मेदारी है।