अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने की घटना ने पूरे प्रदेश में सियासी पारा चढ़ा दिया है। इस मामले की जांच के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा विधायक सतीश महाना का एक बयान सामने आया है, जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया है। महाना ने कहा कि जिन लोगों को यह लग रहा है कि उनका दान चोरी हो गया है, तो यह भी संभव है कि उन्होंने वह दान सच्ची श्रद्धा से न दिया हो। उनके इस बयान पर कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने तीखी नाराजगी जताई है और इसे सीधे तौर पर करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
सतीश महाना ने इस दौरान मंदिर ट्रस्ट और वहां की कार्यप्रणाली पर अपना भरोसा जताते हुए कहा कि उनकी मान्यता है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया पाई-पाई का हिसाब मंदिर के निर्माण और विकास कार्यों में ही लगा है। उन्होंने दलील दी कि आज राम मंदिर का जो दिव्य और भव्य स्वरूप दुनिया देख रही है, वही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दान का सदुपयोग सही ढंग से हुआ है।
महाना के अनुसार, देश भर के करोड़ों लोगों ने जो श्रद्धापूर्वक योगदान दिया, उसका परिणाम आज सबके सामने है। उन्होंने इशारा किया कि मंदिर की प्रगति को देखकर दान के उपयोग पर किसी भी प्रकार का संदेह करने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष के इस बयान पर विपक्षी दलों ने करारा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह की बातें कहकर श्रद्धालुओं को ही जिम्मेदार ठहराना बेहद निंदनीय है। उन्होंने सवाल किया कि यदि दान या चढ़ावे को लेकर कोई शिकायत या विवाद सामने आया है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि शिकायत करने वाले भक्तों की नीयत पर ही सवाल खड़े किए जाने चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि करोड़ों भक्तों की आस्था के मामले में जवाबदेही तय करने के बजाय सरकार लोगों को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।
विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि किसी भी वित्तीय गड़बड़ी की जांच पारदर्शी एजेंसियों से होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने सलाह दी कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इस पर बोलने से पहले संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से अपने इस बयान पर फिर से विचार करने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का मान रखने की मांग की है।
गौरतलब है कि लखनऊ से लेकर अयोध्या तक इस चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जबरदस्त सियासी खींचतान चल रही है। इन सब परिस्थितियों के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के विवादित बोल ने आग में घी का काम किया है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह भी दोहराया कि हमारा पैसा चोरी नहीं हुआ, वह मंदिर में लगा है और मंदिर का स्वरूप इसका प्रमाण है। फिलहाल, राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, राम मंदिर में चोरी की घटना की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस टीम लगातार जांच-पड़ताल कर रही है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन संदिग्धों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। इस घटनाक्रम का सीधा असर मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था पर भी पड़ा है और वहां बड़े प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
विशेष रूप से, चढ़ावे की रकम चोरी होने के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर सवाल उठे थे। इन सवालों के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।


