असम की संस्कृति और देशभक्ति की हुंकार; इस शुक्रवार रिलीज हो रही है अरबाज खान और डेजी शाह की ‘बिहू अटैक’

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मुंबई (अनिल बेदाग)। असम की मिट्टी की खुशबू, बिहू की रौनक और देशभक्ति की गहरी भावना—इन तीनों को एक सशक्त कहानी में पिरोती फिल्म ‘बिहू अटैक’ इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर रिलीज़ होने जा रही है। असम के सबसे बड़े और पवित्र त्योहार बिहू की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म केवल एक थ्रिलर नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान की भावनात्मक अभिव्यक्ति भी है।

प्रोड्यूसर प्रबीर कांता साहा की यह महत्वाकांक्षी फिल्म असम की ज़मीनी हकीकत को संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है। बिहू के रंगों और उल्लास के बीच बुनी गई कहानी में देशप्रेम, मानवीय संवेदनाएं और रोमांचक घटनाक्रम का संतुलित संगम देखने को मिलेगा, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का दावा करती है।

फिल्म उत्तर-पूर्व भारत में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों को छूते हुए यह संदेश देती है कि उग्रवाद और हिंसा का जवाब केवल ताकत नहीं, बल्कि शिक्षा, एकता और सामाजिक समावेशन भी है। ‘बिहू अटैक’ उस गहरे रिश्ते को उजागर करती है, जो किसी क्षेत्र की संस्कृति और राष्ट्र के बीच मौजूद होता है।

स्टारकास्ट में दमदार नाम

फिल्म में देव मेनारिया, डेज़ी शाह, अरबाज़ खान और राहुल देव अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके अलावा रज़ा मुराद, युक्ति कपूर, एमी मिसोबह (एमी नाज़मा सुल्ताना), हितेन तेजवानी, मीर सरवर, डिम्पू बरुआ, कालिंद्री दास, क्रॉसवेल तिमुंग, जीत रायदुत और अमित लेखवानी जैसे कलाकार भी कहानी को मजबूती देते दिखाई देंगे।

निर्माता बोले— यह असम की आत्मा और सुरक्षाबलों को समर्पित है

फिल्म को लेकर प्रोड्यूसर प्रबीर कांता साहा ने कहा, “‘बिहू अटैक’ मेरे दिल के बेहद करीब है। यह सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि असम की सच्चाई, उसकी संस्कृति और देश के प्रति लोगों के प्रेम का प्रतिबिंब है। इस कहानी के ज़रिये हम यह दिखाना चाहते हैं कि शिक्षा, एकता और इंसानियत डर और हिंसा से कहीं ज़्यादा ताकतवर हैं। यह फिल्म असम की आत्मा और हमारे वीर सुरक्षाबलों को समर्पित है।”

निर्देशन और प्रस्तुति

पीकेएस फिल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन सुज़ाद इक़बाल खान ने किया है। देशभक्ति की भावना, सांस्कृतिक समृद्धि और प्रभावशाली कहानी के साथ ‘बिहू अटैक’ एक ऐसा सिनेमाई अनुभव बनने जा रही है, जो क्षेत्रीय कथाओं को राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ती है।

यह फिल्म न सिर्फ़ असम की कहानी है, बल्कि पूरे देश के लिए यह संदेश भी कि संस्कृति, एकता और इंसानियत ही किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।