दिल्ली से आगरा तक एक ही कहानी: सरकारी खुदाई, अंधेरी रात और नागरिकों की सस्ती जान— कब जागेगा प्रशासन?
एक तरफ वो विशेषाधिकार प्राप्त सत्ता है जो महज आशंकाओं के घेरे में संसद से दूरी बना लेती है, और दूसरी तरफ वो आम नागरिक है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए उन सड़कों पर उतरने को मजबूर है जो उसकी ‘कब्र’ तैयार बैठी हैं। दिल्ली के जनकपुरी में 26 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत कोई […]
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