जौहर की स्मृति और शब्दों की मर्यादा: इतिहास, नारी-अस्मिता और सार्वजनिक विमर्श में संवेदना की जरूरत

इतिहास केवल बीती हुई घटनाओं का संग्रह नहीं है। वह समाज की सामूहिक स्मृति, पीड़ा, संघर्ष, त्याग और अस्मिता का दस्तावेज भी है। इसलिए इतिहास के किसी संवेदनशील प्रसंग पर चर्चा करते समय केवल वर्तमान दृष्टि को आधार बनाना पर्याप्त नहीं होता। उसके पीछे छिपे सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय संदर्भों को समझना भी उतना ही […]

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