शिक्षा, समानता और राष्ट्र निर्माण का आधार हैं सरकारी विद्यालय: आधुनिक दौर में इनकी प्रासंगिकता पर विशेष चिंतन की जरूरत

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसके विशाल भवनों, चौड़ी सड़कों, ऊँची इमारतों या आर्थिक विकास दर से नहीं मापी जाती। किसी देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है। शिक्षा ही वह आधार है जिस पर सभ्यता, संस्कृति, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति का पूरा ढाँचा खड़ा होता है। यदि शिक्षा […]

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सच्ची आध्यात्मिकता बनाम ढोंग: क्या स्व-घोषित बाबाओं पर कानूनी शिकंजा धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप है?

भारत को हमेशा से संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक ज्ञान की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। सदियों से पवित्र पुरुष और महिलाएं दूसरों को करुणा, सत्य, आत्म-अनुशासन और सेवा के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। विभिन्न सुधारकों और संतों के सिद्धांतों ने भारतीय समाज को व्यापक रूप से प्रभावित […]

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शिक्षा का निजीकरण: 10 साल में बंद हुए 94 हजार सरकारी स्कूल, क्या हाशिए पर जा रहा है गरीब का बच्चा?

भारत की शिक्षा व्यवस्था आज एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले एक दशक में लगभग 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं, जबकि इसी अवधि में 51 हजार से अधिक निजी स्कूल खुल गए हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी शिक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि बढ़ते […]

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एपस्टीन फाइल्स का ‘विस्फोट’: क्या वैश्विक सत्ता के काले जाल में फंसा है लोकतंत्र?

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक की जा रही एपस्टीन फाइल्स केवल एक आपराधिक कांड का खुलासा नहीं हैं, बल्कि वे आधुनिक लोकतंत्रों की पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्ता-संरचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। जेफरी एपस्टीन एक ऐसा नाम, जो वित्तीय वैभव, राजनीतिक पहुँच और यौन शोषण के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्याय बन चुका है की […]

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