शास्त्रों की विकृति और जातिवाद का उदय: क्या वाकई ब्राह्मण वर्ग ही शोषण का जिम्मेदार है?

भारत का सामाजिक ढांचा प्राचीन काल से ही विविधता से भरा रहा है, जिसमें विभिन्न समुदायों ने अपने-अपने तरीकों से योगदान दिया। इस संरचना में ब्राह्मणों की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है, क्योंकि वे समाज के बौद्धिक, आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शक के रूप में प्रतिष्ठित रहे हैं। वेदों, उपनिषदों और स्मृतियों में ब्राह्मणों […]

Continue Reading