माला, मीटिंग और मौन हसला: हरियाणा की शिक्षक ट्रांसफर ड्राइव का कटु सच

MIS डेटा, ट्रांसफर नीति और कैबिनेट बैठकों की चर्चाएँ केवल लटकाने की औपचारिकता शिक्षकों के बीच यह धारणा गहराती जा रही है कि MIS डेटा, ट्रांसफर नीति और कैबिनेट बैठकों की चर्चाएँ केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। कई बार इन्हें निर्णयों को टालने या प्रक्रिया में पारदर्शिता के भ्रम को बनाए रखने के साधन […]

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100 किलोमीटर दूर की परीक्षा: क्या अभ्यर्थी की ज़िंदगी इतनी सस्ती है?

“चुनाव में स्टाफ जाता है, परीक्षा में छात्र क्यों? रोज़गार की दौड़ में रास्ते ही कठिन क्यों?” सड़क हादसों में गई युवाओं की जान, कौन लेगा जिम्मेदारी? नौकरी की तलाश में जिंदगी हार रहे बेरोजगार। परीक्षार्थियों का विस्थापन: CET के नाम पर हरियाणा में प्रशासनिक असंवेदनशीलता और मौतें हरियाणा में आयोजित CET परीक्षा ने 15 […]

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कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने वर्षों तक नींव रखी। यह संपादकीय उसी विस्मृति की पीड़ा को उजागर करता है। स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ परीक्षा नहीं, सोच, भाषा और संस्कार गढ़ते हैं। कोचिंग एक पड़ाव है, पर […]

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डॉ. सत्यवान सौरभ और प्रियंका सौरभ प्रेस क्लब द्वारा सम्मानित

‘स्वतंत्र पत्रकारिता और उत्कृष्ट साहित्य लेखन के लिए महात्मा गांधी पुरस्कार’ देवबंद प्रेस क्लब ने सहारनपुर में 2 अक्टूबर 2024 पुरस्कार वितरित किए देवबंद (सहारनपुर), उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब ने विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों को उनके योगदान के लिए अपने वार्षिक पुरस्कार प्रदान किए। इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं में डॉ. सत्यवान सौरभ और प्रियंका […]

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जलवायु परिवर्तन: दोस्ती चाहती हैं आक्रामक प्रजातियाँ

आक्रामक प्रजातियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किए गए कई प्रयास अप्रभावी और अत्यधिक समय की मांग करने वाले साबित हुए हैं। ये प्रजातियाँ अक्सर अपने पारिस्थितिकी तंत्र में गहराई से समा जाती हैं, जिससे उनका उन्मूलन मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के लिए, आक्रामक पौधों की प्रजातियों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल […]

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आखिर क्यों चुप्पी साध गई पक्षियों की चहचाहट?

(सूना-सूना लग रहा, बिन पेड़ों के गाँव। पंछी उड़े प्रदेश को, बांधे अपने पाँव।। पक्षियों को पर्यावरण की स्थिति के सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक माना जाता है। क्योंकि वे आवास परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं और पक्षी पारिस्थितिकीविद् के पसंदीदा उपकरण हैं। पक्षियों की आबादी में परिवर्तन अक्सर पर्यावरणीय समस्याओं का पहला संकेत […]

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