अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई का आज 14वां दिन था। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ मामला सुन रही है। केंद्र सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने दलीलें पेश की।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, द्विवेदी ने कहा कि ‘हम किस संप्रभुता की बात कर रहे हैं? महाराजा हरि सिंह तब विलय के लिए सहमत हुए जब वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा नहीं कर सके। उनका जहाज डूब रहा था।’ द्विवेदी ने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया। दलील दी कि ‘नेहरू जी ने स्वयं कहा था कि संविधान सभा बनाने का विचार भारत सरकार से आया था।’ सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर सुनवाई के सभी अपडेट्स देखिए।
अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: सीनियर एडवोकेट वी गिरि की दलीलें
ऑल इंडिया कश्मीरी समाज की ओर से सीनियर एडवोकेट वी गिरि पेश हुए। उन्होंने कहा, इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर 27.10.1947 की तारीख है। युवराज कर्ण सिंह की ओर से जारी घोषणा देखिए। युवराज के पास पूरा संविधान अनुच्छेद 370 समेत था। एक बार 370 हट जाए और जम्मू-कश्मीर का एकीकरण पूरा हो जाए, तो किसी भी संप्रभुता का प्रतीक कानून बनाने वाली शक्ति है। कानून बनाने की शक्ति संघ और राज्य के पास है।
गिरि ने कहा, ‘अनुच्छेद 370 को स्थायी बनाने का तर्क क्यों? कोई अधिकार प्रदान करने के लिए? स्पष्ट रूप से नहीं। तो फिर किसलिए? वह कौन सा अधिकार है जिसके बारे में याचिकाकर्ता वास्तव में चिंतित हैं? यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि 370(3) के तहत राष्ट्रपति की शक्ति का उपयोग नहीं किया जा सकता…।’
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़: संघवाद पर हम सोमवार को सुनवाई करेंगे।
द किंग इज डेड… सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के वकील की दलील
हमारी स्वतंत्रता, भारत स्वतंत्रता अधिनियम से दान में नहीं मिली। हमने पहले ही गणतंत्र बनाने का संकल्प ले लिया था। हमने सभी राज्यों के शासकों को यह स्पष्ट करने के लिए अनुकूलन आदेश में संशोधन किया कि जिस क्षण आप दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हैं, आप संघ का हिस्सा हैं, आप अभिन्न हैं। यह हैरानी की बात है कि मेरे दाहिनी ओर बैठे मित्र जो लोकतंत्र में आस्था रखते हैं, एक ऐसे ताज के आधार पर स्थायित्व की मांग कर रहे हैं जो कब का जा चुका है। राजा मर चुके हैं, राजा अमर रहें। (The king is dead, long live the king)
सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी की दलीलें
भारत सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी भी जिरह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘नेहरू जी ने स्वयं कहा था कि संविधान सभा बनाने का विचार भारत सरकार से आया था।’
द्विवेदी ने कहा, ‘मिस्टर सिब्बल ने कैबिनेट मिशन योजना, सर्वोपरिता की वापसी से शुरुआत की… वहां से संप्रभुता तत्व प्राप्त होता है। जो बात भुला दी गई, वह यह कि कैबिनेट मिशन योजना भारत के भीतर एक बड़े पाकिस्तान को तैयार करने का एक ब्रिटिश साधन था… ऐसी चीज जिसकी मांग मुस्लिम लीग ने भी नहीं की थी, अंग्रेज उसे बना रहे थे क्योंकि वे भू-राजनीतिक कारणों से दोनों सीमाओं पर नियंत्रण करना चाहते थे। इसलिए वे एक कैबिनेट मिशन योजना लेकर आए।’
द्विवेदी ने कहा, ‘महाराजा हरि सिंह तब भी एक राष्ट्रीय सभा के बारे में सोच रहे थे और जनमत संग्रह का सपना देख रहे थे… वह ऐसा सोचने वाले होते कौन हैं… कश्मीर का भारत में विलय हो चुका था.. हम कैसे कह सकते हैं कि विलय पूर्ण नहीं हुआ था आदि… हालांकि, डॉ. कर्ण सिंह कहा था कि वे भारत के संविधान से शासित होंगे।’
सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा– जब अनुच्छेद 1 क्षेत्र के विलय आदि की बात करता है तो यह गलत नहीं है… यह एक क़ानून से प्राप्त जनादेश है और सभी इससे बंधे हैं।
Compiled: up18 News