पेगासस जासूसी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते का और समय दिया

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करने वाले राजनेताओं, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं आदि की व्यापक और टारगेटेड निगरानी के आरोपों की जांच कर रही कोर्ट द्वारा नियुक्त तकनीकी समिति को अपनी रिपोर्ट इस जांच का पर्यवेक्षण कर रहे पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आरवी रवींद्रन को सौंपने के लिए और चार हफ्ते का और समय दिया है। सीजेआई एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि उसे समिति से अंतरिम रिपोर्ट मिली है, जिसने मैलवेयर संक्रमण के संदिग्ध 29 मोबाइल उपकरणों का परीक्षण किया है। हालांकि, समिति ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए मई 2022 के अंत तक का समय मांगा है।

“उन्होंने 29 मोबाइलों की जांच की है। उन्होंने अपना खुद का सॉफ्टवेयर विकसित किया है। उन्होंने सरकार और पत्रकारों सहित एजेंसियों को भी नोटिस जारी किए हैं … इसने अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए समय मांगा है। अब, यह सब प्रक्रिया में है। हम उन्हें समय देंगे।”
सीजेआई रमना ने कहा।

पीठ ने हालांकि याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा अंतरिम रिपोर्ट उपलब्ध कराने के अनुरोध पर कोई आदेश पारित नहीं किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का विरोध करते हुए कहा कि यह केवल एक अंतरिम रिपोर्ट है।

पीठ ने समिति को मोबाइल उपकरणों की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है, अधिकतम, 4 सप्ताह का समय दिया गया है और कहा गया है कि, तकनीकी समिति, इस अवधि में, पर्यवेक्षण न्यायाधीश, पूर्व एससी न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन को अपनी रिपोर्ट भेजें। निगरानी करने वाले न्यायाधीश अपनी टिप्पणियों को रिपोर्ट में जोड़ेंगे और उसके बाद वे एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। गर्मी की छुट्टियों के बाद कोर्ट के दोबारा खुलने के बाद इस मामले पर जुलाई में विचार किया जाएगा।

अदालत को 23 फरवरी को रिपोर्ट पर विचार करने की उम्मीद थी। हालांकि सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर सुनवाई टाल दी गई थी। कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरवी रवींद्रन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था और कमेटी से मामले की जल्द से जल्द जांच करने को कहा था। इस कार्य में देखरेख करने वाले न्यायाधीश की सहायता के लिए निम्न को नियुक्त किया गया था।

1. आलोक जोशी, पूर्व आईपीएस अधिकारी (1976 बैच)¯
2. डॉ. संदीप ओबेरॉय, अध्यक्ष, उप समिति (अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन/अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रो-तकनीकी आयोग/संयुक्त तकनीकी समिति)।

साथ ही तीन सदस्यीय तकनीकी समिति में निम्न महानुभाव शामिल थे,

1. डॉ नवीन कुमार चौधरी, प्रोफेसर (साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक) और डीन, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात।
2. डॉ. प्रभारन पी., प्रोफेसर (इंजीनियरिंग स्कूल), अमृता विश्व विद्यापीठम, अमृतापुरी, केरल।
3. डॉ अश्विन अनिल गुमस्ते, इंस्टीट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे, महाराष्ट्र।

न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह पता लगाने के बाद कि याचिकाकर्ताओं ने एक मामला जिसमे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं की जांच के लिए उपरोक्त जांच समिति का गठन किया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देते हुए और अनधिकृत रूप से की जाने वाली किसी भी निगरानी के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए, CJI एनवी रमना के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा था कि, राज्य द्वारा उठाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार, न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह से, बहिष्कृत नहीं कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने यह बताते हुए कि, क्या यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा था, और पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया था, यह खुलासा करने से इनकार कर दिया था। केंद्र के बचाव को खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा कि केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करने से राज्य को किसी की निगरानी का आधार या फ्री पास नहीं मिल सकता है। कोर्ट ने केंद्र के इस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया कि, वह यह कहकर तकनीकी समिति बना सकती है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति की जरूरत है।

पेगासस विवाद 18 जुलाई को द वायर और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों द्वारा मोबाइल नंबरों के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद शुरू हुआ था, जो भारत सहित विभिन्न सरकारों को एनएसओ कंपनी द्वारा दी गई स्पाइवेयर सेवा के संभावित लक्ष्य थे। द वायर के अनुसार, 40 भारतीय पत्रकार, राहुल गांधी जैसे राजनीतिक नेता, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, ईसीआई के पूर्व सदस्य अशोक लवासा आदि को निगरानी टारगेट की सूची में बताया गया है।

इसके बाद मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए शीर्ष न्यायालय के समक्ष कई याचिकाएं दायर की गईं, जिन पर नोटिस जारी किया जाना बाकी है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कथित घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नि:संदेह आरोप गंभीर हैं, यदि रिपोर्ट्स सही हैं तो। सीजेआई एनवी रमना ने कहा, “सच्चाई सामने आती है, यह एक अलग कहानी है। हमें नहीं पता कि इसमें किसके नाम हैं।”

याचिकाएं अधिवक्ता एमएल शर्मा, पत्रकार एन राम और शशि कुमार, माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, पांच पेगासस टारगेट्स (परंजॉय गुहा ठाकुरता, एसएनएम आब्दी, प्रेम शंकर झा, रूपेश कुमार सिंह और इप्सा, शताक्सी, सामाजिक कार्यकर्ता जगदीप छोक्कर, नरेंद्र कुमार मिश्रा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सहित कई लोगों द्वारा दायर की गई हैं।

(विजय शंकर सिंह)

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