सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा, तो इमरान मसूद संवेदना जताने पहुंचे; खामेनेई की मौत पर कांग्रेस हुई आक्रामक

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नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्लाह अली खामेनेई की ‘टारगेटेड हत्या’ के बाद देश में सियासत गर्मा गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ दोतरफा रणनीति अपनाई है। एक तरफ जहाँ कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने सरकार की “चुप्पी” पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी सांसद इमरान मसूद ने नई दिल्ली में खामेनेई के प्रतिनिधि से मिलकर औपचारिक संवेदना व्यक्त की है।

इमरान मसूद की मुलाकात और नेहरू-गांधी का जिक्र

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मंगलवार को भारत में खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाह से मुलाकात की। इस दौरान मसूद ने कहा कि किसी देश के प्रमुख की इस तरह हत्या किया जाना बेहद दुखद है। उन्होंने भारत-ईरान के 3000 साल पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए एक दिलचस्प दावा किया। मसूद ने कहा, “खामेनेई नेहरू-गांधी के विचारों से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की प्रसिद्ध किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ को चार बार पढ़ा था।”

​सरकार की विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल

मुलाकात के बाद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा, “यह विचलित करने वाला है कि जब आप यूएई, सऊदी अरब और इजरायल से बात कर रहे हैं, तो ईरान के लिए दो शब्द भी नहीं बोले गए। हिंदुस्तान को हमेशा न्यूट्रल (तटस्थ) नजर आना चाहिए, यही हमारी ऐतिहासिक विदेश नीति रही है।”

​सोनिया गांधी का ‘ओपिनियन’ वार

इससे पहले सोनिया गांधी ने एक प्रमुख समाचार पत्र में लेख (Opinion) के जरिए सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने खामेनेई की हत्या पर मोदी सरकार की औपचारिक निंदा न किए जाने को ‘मौन समर्थन’ का संकेत बताया। सोनिया गांधी ने कड़े शब्दों में कहा, “सरकार का यह रवैया तटस्थ रहना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को त्यागना है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अपनी पुरानी स्वतंत्र विदेश नीति से भटक रहा है।

​पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव के बीच कांग्रेस का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह इस मुद्दे पर सरकार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरने की पूरी तैयारी में है।