प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के दिन हुए विवाद के बाद ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना लगातार जारी है। पुलिस द्वारा उनकी पालकी (रथ) यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य उसी स्थान पर धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़कर गई थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने पूरी रात ठंड में धरना दिया और करीब 20 घंटे से अन्न का एक दाना तक ग्रहण नहीं किया, साथ ही पानी भी छोड़ने की बात कही गई है।
शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा है कि जब तक पुलिस प्रशासन उन्हें सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ संगम तक नहीं ले जाएगा, तब तक वह गंगा स्नान नहीं करेंगे।
मीडिया प्रभारी का दावा—प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी नहीं आया
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि शंकराचार्य ने शनिवार से कुछ भी नहीं खाया है और किसी प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने सुबह अपनी पूजा और दंड तर्पण भी उसी स्थान पर किया। संभावना जताई जा रही है कि शंकराचार्य कुछ देर में बीते दिन की घटना को लेकर मीडिया से बातचीत करेंगे।
मौनी अमावस्या पर 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने किया स्नान
इधर, मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर प्रशासनिक आंकड़े भी सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक 4 करोड़ 52 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस आंकड़े के आधार पर रविवार को प्रयागराज को दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में शामिल बताते हुए चर्चा तेज हो गई है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
रविवार को मौनी अमावस्या स्नान के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम की ओर पालकी (रथ) में जा रहे थे। पुलिस ने भीड़ अधिक होने का हवाला देते हुए उनसे रथ से उतरकर पैदल चलने का आग्रह किया।
बताया गया कि इस पर शंकराचार्य के शिष्य पालकी के साथ आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जिससे पुलिस और शिष्यों के बीच बहस, धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई। आरोप है कि इस दौरान कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया और एक साधु के साथ चौकी में मारपीट की बात भी सामने आई।
इसके बाद शंकराचार्य नाराज हो गए और उन्होंने स्नान करने से इनकार कर दिया।
पुलिस-प्रशासन का पक्ष
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि शंकराचार्य बिना अनुमति पालकी पर पहुंचे थे। संगम पर अत्यधिक भीड़ थी। आरोप है कि समर्थकों ने बैरियर तोड़े और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की, जिसकी जांच की जा रही है।
शंकराचार्य के समर्थन में हर्षा रिछारिया
इस मामले में हर्षा रिछारिया भी शंकराचार्य के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि संतों और महिलाओं का सम्मान भारतीय संस्कृति का मूल है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
शंकराचार्य का आरोप—सरकार के इशारे पर उत्पीड़न
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार किसी “ऊपरी आदेश” के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि जब महाकुंभ में भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी, तब उन्होंने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था और संभवतः उसी नाराजगी में उन्हें परेशान किया जा रहा है।
फिलहाल माघ मेले में यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि शंकराचार्य का धरना जारी है।

