लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जेठ की तपिश के बीच मौसम ने ऐसा रौद्र रूप धारण किया है कि राहत की उम्मीदें अब आफत में बदल गई हैं। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से पूरे प्रदेश का मिजाज बदल चुका है, लेकिन यह बदलाव अपने साथ भारी तबाही लेकर आया है।
पिछले 24 से 48 घंटों के भीतर हुई अतिवृष्टि, भीषण आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल इंसानों बल्कि बेजुबानों पर भी कहर ढाया है, जिसमें 24 पशुओं की भी मौत हुई है।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख: “24 घंटे में मिले मुआवजा”
प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मृतकों के परिजनों को 24 घंटे के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, घायलों के मुफ्त और बेहतर इलाज की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि सभी जिला अधिकारी (DM) स्वयं फील्ड में उतरकर स्थिति की निगरानी करें; किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगले 48 घंटे बेहद नाजुक: 42 जिलों में अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अभी खतरा टला नहीं है। राजधानी लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के 42 जिलों में आंधी और बारिश का ऑरेंज व येलो अलर्ट जारी है। जौनपुर, गोरखपुर, वाराणसी और सहारनपुर में तेज हवाओं का अनुमान है, जबकि प्रयागराज, चित्रकूट, बरेली और मुरादाबाद सहित 12 जिलों में ओलावृष्टि (Hailstorm) का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 7 मई तक 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।
फसलों को भारी चोट, संभल में रिकॉर्ड बारिश
मई की चिलचिलाती धूप के बीच आए इस ‘मिनी मानसून’ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बेमौसम बारिश और ओलों ने गेहूं और आम की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। आंकड़ों के अनुसार, संभल में सबसे ज्यादा 130 मिमी और कासगंज में 97 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि अगले दो-तीन दिनों तक यह सिलसिला जारी रह सकता है, जिससे तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी।
सुरक्षा अपील
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने नागरिकों से अपील की है कि वे आंधी-तूफान के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या कच्चे घरों के नीचे शरण न लें। सुरक्षित स्थानों पर रहें और मौसम के अपडेट पर नजर रखें।

