सियासी महासंग्राम के नतीजे: ममता और स्टालिन को मिली करारी हार, केरल में 10 साल बाद UDF की सत्ता में वापसी, असम-पुडुचेरी में फिर खिला कमल

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नयी दिल्ली: देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति की नई पटकथा लिख दी है। पश्चिम बंगाल में जहाँ ‘भगवा आंधी’ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल पुराने अभेद्य दुर्ग को ढहा दिया है, वहीं दक्षिण भारत में सुपरस्टार जोसेफ विजय चंद्रशेखर (थलापति विजय) की नई पार्टी ‘टीवीके’ ने तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को हिलाकर रख दिया है।

तमिलनाडु: ‘थलापति’ विजय का धमाकेदार डेब्यू

तमिलनाडु में अभिनय जगत से राजनीति में आये जोसेफ विजय चंद्रशेखर की पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कषगम (टीवीके) भारी उलट फेर करते हुए सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। वहां किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के एक दशक के शासन को समाप्त करते हुए दो तिहाई बहुमत हासिल किया है।

पश्चिम बंगाल: दशकों का इंतजार खत्म, श्यामा प्रसाद के घर में भाजपा की ‘सुनामी’

पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी आंधी में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहीं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख सुश्री ममता बनर्जी को भी भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। साथ ही उनके कई मंत्री भी चुनाव हार गये हैं। सुश्री बनर्जी को भवानीपुर सीट से भाजपा नेता सुवेन्दु अधिकारी ने 15,000 से अधिक मतों से हराया। श्री अधिकारी नंदीग्राम सीट से भी विजयी हुए हैं।

तमिलनाडु में भी मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख एम के स्टालिन को हार का मुंह देखना पड़ा है। उन्हें टीवीके के उम्मीदवार ने हराया । असम में कांग्रेस के प्रमुख नेता एवं सांसद तरूण गोगोई को भी हार का सामना करना पड़ा है। केरल में मुख्यमंत्री पी विजयन चुनाव जीत गये हैं लेकिन उनके कई मंत्रियों को हार का मुंह देखना पड़ा है।

असम में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भाजपा नीत गठबंधन की सत्ता को लगातार तीसरी बार बरकरार रखा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को राज्य की जनता की दशकों की प्रतीक्षा की पूर्ति बताते हुए कहा है ‘ आज से बंगाल भय से मुक्त हुआ ” राज्य अब विकास की राह पर आ गया है। उन्होंने जीत को देश भक्ति के गीत वंदे मातरम् के रचयिता ऋषि कवि बंकिमचंद चटोपाध्याय को समर्पित करते हुए कहा कि आज जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों के पूरा होने का दिन है। उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

पश्चिम बंगाल में 294 में से 293 के नतीजे आये हैं। भाजपा ने दो तिहायी से अधिक बहुत के साथ 206 सीटों पर जीत दर्ज की है। सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस 81 सीट पर सिमट गयी है। कांग्रेस और आम जनता उन्नयन पार्टी ( ए जे यू पी ) ने दो-दो और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक सीट जीती है। कांग्रेस तथा मकपा का पिछले चुनाव में खाता भी नहीं खुला था।

फाल्टा विधानसभा पर 21 मई को दोबारा चुनाव कराया जायेगा। वर्ष 2021 के चुनावों में तृणमूल ने 213 तथा भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं।

तमिलनाडु में अभिनेता विजय के करिश्मे के दम पर टीवीके स्पष्ट रूप से सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है हालाकि वह 118 के बहुमत के आंकड़े से पीछे है। उसे 234 में 107 सीटें मिली हैं । सत्तारूढ द्रमुक दूसरे स्थान पर है और उसे 60 सीटें मिली हैं। अन्नाद्रमुक 47 सीट जीतकर तीसरे स्थान पर है।
कांग्रेस को पांच सीटें और पीएमके को चार सीटें मिली हैं । पिछले चुनाव में द्रमुक गठबंधन को 158 जबकि अन्नाद्रमुक गठबंधन को 69 सीटें मिली थी।

केरल: एक दशक बाद ‘हाथ’ में आई सत्ता

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटों के साथ दो तिहाई बहुमत हासिल कर दस साल बात सत्ता में जबरदस्त वापसी की है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तीन सीटें जीत कर पहली बार खाता खोलने में सफल रही है। कांग्रेस को 63 और उसके सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 22 , मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 26, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को 08 और केईसी को 7 सीटें मिली हैं। पिछली चुनाव में एलडीएफ को 94 और यूडीएफ को 42 सीट मिली थीं।

असम और पुडुचेरी: ‘प्रो-इन्कंबेंसी’ की जीत

असम और पुड्डुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने अपनी सत्ता बरकरार रखी है। असम विधानसभा भाजपा को 82 , उसके सहयोगी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट तथा असम गणपरिषद को 10-10 सीटें मिली हैंं । कांग्रेस सीर्फ 19 सीटों पर सिमट गयी है। । एआईयूडीएफ को दो सीटें हासिल हुई हैं। पिछले चुनावों में राजग को 74, कांग्रेस गठबंधन को 28 तथा एआईयूडीएफ को 15 सीटें मिली थीं। पुड्डुचेरी सत्तारूढ राजग गठबंघन को 30 में से 18 सीटों पर सफलता मिली है।

बड़े दिग्गजों का हुआ पतन

यह चुनाव बड़े चेहरों के लिए ‘कब्रगाह’ साबित हुआ। जहाँ ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन जैसे कद्दावर मुख्यमंत्री अपनी सीट नहीं बचा सके, वहीं असम में कांग्रेस के दिग्गज नेता तरुण गोगोई को भी हार झेलनी पड़ी। केरल में मुख्यमंत्री पी. विजयन तो चुनाव जीत गए, लेकिन उनके मंत्रिमंडल के अधिकांश सहयोगी धराशायी हो गए।