आगरा: कमला नगर स्थित जनक पार्क में आर्य केंद्रीय सभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘आर्य महासम्मेलन’ रविवार को भव्य समापन के साथ संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि आर्य समाज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक सशक्त आंदोलन है। देशभर से आए लगभग 5 हजार आर्यजनों ने इस महामंथन में शिरकत की।
कुरीतियों पर प्रहार और वैदिक मार्ग का आह्वान
मुख्य वक्ता आचार्य स्वदेश (मथुरा) ने कहा कि दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और नशाखोरी समाज को भीतर से खोखला कर रही हैं। उन्होंने युवाओं से वेदाध्ययन और चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। वहीं, स्वामी विश्वानंद ने समाज के नैतिक पतन का कारण वेदों से दूरी बताया।
नारी शक्ति और संस्कारों पर जोर
कन्या गुरुकुल सासनी की आचार्या पवित्रा ने वेदों में नारी के सर्वोच्च स्थान का उल्लेख करते हुए दहेज प्रथा को मानवता पर कलंक बताया। आचार्य विष्णुमित्र वेदारथी ने शिक्षा के साथ संस्कारों की अनिवार्यता पर जोर दिया, ताकि समाज को सही दिशा मिल सके।
सरकार से 5 सूत्रीय मांगें
महासम्मेलन के समापन पर विद्वानों ने सामूहिक रूप से सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं:
जातिवाद का पूर्ण उन्मूलन।
राष्ट्रव्यापी नशा मुक्ति अभियान।
अंधविश्वास और पाखंड का अंत।
गौ हत्या पर प्रभावी कानूनी रोक।
देशभर में समान शिक्षा कानून लागू करना।
सम्मान और साहित्य विमोचन
सभा के प्रधान सीए मनोज खुराना ने बताया कि इस अवसर पर ‘आर्य सम्मान’ से 12 विभूतियों को अलंकृत किया गया। साथ ही, अरविंद मेहता की पुस्तक ‘जीव-ईश्वर-प्रकृति’ और ईश्वर अग्रवाल की पुस्तक ‘वेद पीयूष’ का विमोचन भी किया गया।
भक्तिमय रहा वातावरण
कार्यक्रम संयोजक प्रदीप कुलश्रेष्ठ के अनुसार, प्रतिदिन योग, यज्ञ और ध्यान के साथ भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को वैदिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन आर्य अश्वनी ने किया।

