अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की चल रही गहन जांच के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, जिसने सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी (SIT) की छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के निजी आवास से ‘राम राज्य कोष’ का एक आधिकारिक दान बक्सा बरामद किया गया है। इस घटना ने जांच के दायरे को और अधिक विस्तृत कर दिया है, क्योंकि बक्से पर डिजिटल भुगतान के लिए लगा क्यूआर (QR) कोड यह संकेत दे रहा है कि मामला महज चोरी का नहीं, बल्कि संगठित वित्तीय गड़बड़ी का हो सकता है।
जांच एजेंसियों के लिए पहेली बनी बक्से की मौजूदगी
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अविनाश शुक्ला के ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान यह दान पात्र हाथ लगा है। यह कोई साधारण संदूक नहीं है, बल्कि राम राज्य कोष का अधिकृत उपकरण है, जिसका उपयोग श्रद्धालुओं से चंदा एकत्र करने के लिए किया जाता है। बक्से पर क्यूआर कोड का होना इसे और भी संदिग्ध बनाता है। अब जांच टीम इस बिंदु पर केंद्रित है कि मंदिर परिसर की वस्तु आरोपी के घर तक किस तरह पहुँची? क्या इसे किसी की शह पर ले जाया गया था या यह अनधिकृत धन उगाही का एक बड़ा जरिया था?
नया मोड़: डिजिटल लेनदेन का हो रहा विश्लेषण
राम मंदिर चढ़ावे की जांच पहले ही नियुक्तियों और नकदी गणना में हुई धांधली तक सीमित थी, लेकिन अब दान पेटी की बरामदगी ने इसे एक नए आयाम पर ला खड़ा किया है। जांच एजेंसियां अब इस क्यूआर कोड के माध्यम से हुए लेनदेन का कच्चा-चिट्ठा खंगालने में जुटी हैं। प्राथमिक तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस कोड को स्कैन करने पर पैसा किस खाते में ट्रांसफर होता था। यदि यह राशि मंदिर ट्रस्ट के आधिकारिक खातों में न जाकर किसी निजी खाते में जा रही थी, तो यह धोखाधड़ी का एक अत्यंत गंभीर मामला साबित हो सकता है।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
एसआईटी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन बक्सों के वितरण, उनकी सुरक्षा और रख-रखाव की जिम्मेदारी किसकी थी। क्या ऐसे संवेदनशील उपकरण किसी निजी व्यक्ति को सुपुर्द करने का कोई प्रोटोकॉल था? यदि नहीं, तो किसकी मिलीभगत से इसे बाहर भेजा गया? सूत्रों का दावा है कि इस मामले में जल्द ही ट्रस्ट से जुड़े कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों और पदाधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है, ताकि व्यवस्था में व्याप्त खामियों और जिम्मेदार चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राम मंदिर दान मामले में पहले भी नियुक्तियों में पक्षपात और कैश हैंडलिंग में अनियमितताओं जैसी कई परतें खुल चुकी हैं। अविनाश शुक्ला के घर से बरामद हुए इस बक्से ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। एसआईटी के अधिकारियों का मानना है कि बक्से के मूवमेंट और डिजिटल रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज लापरवाही है या फिर मंदिर के धन को हड़पने का कोई सुनियोजित षड्यंत्र। फिलहाल, जांच टीम यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि इस पूरे खेल के पीछे के असल सूत्रधार कौन हैं और वे किन-किन बड़े चेहरों से जुड़े हैं।


