पाकिस्तान के मौलाना तारिक जमील ने कहा, ज्‍यादातर मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे

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पाकिस्तान के यूट्यूबर सुहेब चौधरी ने अपने चैनल रियल एंटरटेनमेंट के लिए ख्वाजा जमशेद से इस पर बात की है। इतिहास के जानकार ख्वाजा जमशेद ने कहा कि ये एक सच्चाई है क्योंकि इस्लाम के भारतीय उपमहाद्वीप में आने से पहले भी तो लोग थे। जाहिर वो लोग किसी दूसरे धर्म को मानते थे।

जमशेद ने कहा कि पाकिस्तान बनाने के हामियों में से एक अल्लामा इकबाल ने खुद के पूर्वजों के ब्रह्राण होने की बात मानी थी। उन्होंने कहा कि खुद मेरे पूर्वज 1700 के आसपास इस्लाम में आए तो क्या उससे पहले मेरा कोई पूर्वज नहीं था। जाहिर है जो थे वो हिन्दू थे और पंडित थे। यहां तक कि मक्का में भी मोहम्मद साहब के आने के बाद लोगों ने इस्लाम कबूला। ऐसे में ये तो बहुत साफ है कि हमारे में से ज्यादातर लोगों के पूर्वज कुछ सौ साल पहले मुसलमान नहीं थे।

“पाकिस्तान ने इतिहास से छेड़छाड़ की”

सुहेब ने कहा कि मोहम्मद बिन कासिम को पाकिस्तान में हीरो कहा जाता है। किताबों में भी उन मशहूर लोगों को जगह नहीं दी जाती, जो मुसलमान नहीं है। इस पर ख्वाजा जमशेद ने कहा, “मोहम्मद बिन कासिम को पाकिस्तान में हीरो माना जाता है लेकिन हमारे बच्चों को क्यों उसे हीरो पढ़ाया जा रहा है। वो यकीनी तौर पर अरबों के लिए बेहतर हो सकता है लेकिन हमारे लिए तो राजा दाहिर हीरो हो सकता है। हम महमूद गजनवी ने लाहौर को जीता तो पूरे शहर को जलवा दिया था। हम उसे भी हीरो बनाकर पेश कर रहे हैं, ये पाकिस्तानियों की बड़ी दिक्कत है।

जमशेद ने कहा कि हमारे लिए तो इस मिट्टी में पैदा हुए लोग, पंजाब के बेटे हीरो हैं। राजा पोरस हो या भगत सिंह, ये हमारे हीरो हैं। ख्वाजा ने ये भी कहा कि पाकिस्तान बनने और मोहम्मद अली जिन्ना की मौत के बाद जिस तरह से मुल्क को मजहबी रंग दिया गया, वो एक भूल थी।

जिन्ना ने तो कहा था कि किसी रियासत का मजहब नहीं हो सकता है। जब देश को मजहबी बना दिया गया तो फिर अवाम के दिमागों को भी बदलना था। इसीलिए इतिहास में कासिम और गजनवी को हीरो बनाने की कोशिश की गई। एक बड़ा समय, जिसमें मुसलमान अगर राजा नहीं हैं तो उनको किताबों से ही हटा दिया गया।

-एजेंसी