टूट गया पुराना फॉर्मूला: आगरा नगर निगम मनोनीत पार्षदों की सूची देख चौंके भाजपाई, उच्च शिक्षा मंत्री के क्षेत्र को मिली महज एक सीट

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आगरा: ताजनगरी नगर निगम के लिए मनोनीत 10 पार्षदों की सूची जारी होते ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। दशकों से चले आ रहे क्षेत्रीय संतुलन के फॉर्मूले को दरकिनार किए जाने से पार्टी के कई गुट और पुराने कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सूची आगामी स्थानीय राजनीति के समीकरणों को बिगाड़ सकती है।

​3-3-3-1 का फॉर्मूला हुआ ध्वस्त

भाजपा में अब तक यह परंपरा थी कि शहरी क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों आगरा उत्तर, आगरा दक्षिण और आगरा छावनी से तीन-तीन पार्षद और एत्मादपुर से एक पार्षद मनोनीत किया जाता था। लेकिन इस बार का गणित पूरी तरह बदल गया है। जारी सूची में आगरा उत्तर को 5 सीटें दी गई हैं, जबकि छावनी और एत्मादपुर को 2-2 सीटें मिली हैं। सबसे ज्यादा हैरानी आगरा दक्षिण क्षेत्र को लेकर है, जिसे महज 1 सीट पर समेट दिया गया है।

​उच्च शिक्षा मंत्री के क्षेत्र में सबसे ज्यादा मायूसी

आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का गढ़ माना जाता है। यहाँ से केवल सुनील कर्मचंदानी को जगह मिली है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का तर्क है कि सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय क्षेत्र होने के बावजूद दक्षिण की अनदेखी संगठन के भीतर आंतरिक कलह को बढ़ा सकती है।

​हारने वालों को तरजीह, पुराने नामों की छुट्टी

भाजपा की एक अघोषित नीति रही है कि चुनाव हार चुके प्रत्याशियों को मनोनयन में प्राथमिकता नहीं दी जाती। हालांकि, इस बार खंदारी से पिछला चुनाव हार चुके धर्मवीर सिंह सिकरवार को सूची में शामिल कर पार्टी ने सबको चौंका दिया है। इसके अलावा नितीश भारद्वाज और पंकज सिकरवार जैसे नामों को लेकर भी कार्यकर्ताओं में भारी आश्चर्य है, क्योंकि इनके नामों की स्थानीय स्तर पर चर्चा तक नहीं थी।

​लखनऊ की ‘वीटो’ से स्थानीय नेता हैरान

बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर से जो पैनल बनाकर लखनऊ भेजा गया था, उसमें अंतिम समय पर बड़े बदलाव किए गए। कई ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम काट दिए गए जो वर्षों से इस उम्मीद में थे। अब चर्चा है कि इस असंतोष की गूँज जल्द ही संगठन के बड़े पदाधिकारियों और लखनऊ तक पहुँच सकती है।