बिहार की राजनीति में ‘नीतीश युग’ का नया मोड़: CM ने खुद किया ऐलान- ‘मैं जाना चाहता हूँ राज्यसभा’

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पटना। बिहार की सियासत में पिछले कई दिनों से चल रही धुंध अब साफ हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक भावुक पोस्ट साझा कर यह कन्फर्म कर दिया है कि वे अब राज्यसभा के जरिए दिल्ली की राजनीति में कदम रखने जा रहे हैं। नीतीश कुमार के इस फैसले के साथ ही बिहार में उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नीतीश कुमार का भावुक संदेश: “दोनों सदनों का सदस्य बनने की थी इच्छा”

​नीतीश कुमार ने बिहार की जनता का आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि दो दशकों से मिले समर्थन की बदौलत ही वे बिहार की सेवा कर पाए। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत इच्छा जाहिर करते हुए कहा, “संसदीय जीवन की शुरुआत से ही मेरे मन में इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल और संसद, दोनों के दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में अब मैं राज्यसभा जाना चाह रहा हूँ।” उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

निशांत कुमार की जॉइनिंग टली: क्या है वजह?

​सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की आज यानी 5 मार्च को होने वाली जेडीयू में जॉइनिंग फिलहाल टल गई है। इसके पीछे की बड़ी वजह पार्टी कार्यकर्ताओं की मायूसी बताई जा रही है। दरअसल, नीतीश के बिहार छोड़ने के फैसले से पार्टी का एक बड़ा खेमा दुखी है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस गमगीन माहौल में निशांत का ‘राजतिलक’ उस भव्यता के साथ नहीं हो पाएगा, जिसकी योजना बनाई गई थी।

बीजेपी ने बढ़ाए 3 नाम: कौन संभालेगा बिहार की कमान?

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबकी नजरें इस पर हैं कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? हमारे सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नेतृत्व ने तीन प्रमुख नाम आगे बढ़ाए हैं:

दिलीप जायसवाल (बिहार सरकार में मंत्री)
​सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री)
​नित्यानंद राय (लोकसभा सांसद)

माना जा रहा है कि यदि इन तीनों नामों पर आम सहमति बनने में कोई बाधा आई, तो बीजेपी किसी ‘सरप्राइज फेस’ को भी सामने ला सकती है। आज शाम तक बिहार की सत्ता का यह नया समीकरण पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

​देर रात तक चला मान-मनौव्वल का दौर

​बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं के विरोध और दुख को देखते हुए नीतीश कुमार कल शाम तक नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं थे। हालांकि, देर रात जेडीयू के एक कद्दावर नेता उन्हें समझाने में कामयाब रहे, जिसके बाद उन्होंने हामी भरी। अब पार्टी में एक खेमा इस नई पारी को लेकर उत्साहित है, तो दूसरा खेमा अपने प्रिय नेता के बिहार की सक्रिय सत्ता से दूर जाने पर गमगीन है।