लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने लखनऊ दौरे के दौरान ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ में कई बड़े बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम मूल रूप से हिंदू ही हैं, वे अरब से नहीं आए हैं। उन्होंने ‘घर वापसी’ अभियान पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग वापस हिंदू धर्म में लौट रहे हैं, हमें उनका पूरा ख्याल रखना होगा।
जनसंख्या और घुसपैठ पर बड़ी चेतावनी:
मोहन भागवत ने हिंदू परिवारों और नव-दंपतियों को सलाह देते हुए कहा कि समाज के अस्तित्व के लिए हर हिंदू जोड़े को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो समाज अपनी आबादी कम करता है, उसका भविष्य समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने देश में बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचानो, हटाओ और बाहर निकालो) का मंत्र दिया। उन्होंने अपील की कि घुसपैठियों को रोजगार न दिया जाए।
सामाजिक समरसता और मातृशक्ति:
जातिगत भेदभाव पर प्रहार करते हुए भागवत ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और जातियों को आपसी झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को ‘असुर मर्दिनी’ और शक्ति का प्रतीक बताते हुए कहा कि उन्हें अबला समझना गलत है। भागवत के अनुसार, भारतीय संस्कृति में स्त्री को भोग की वस्तु नहीं बल्कि ‘माता’ के रूप में देखा जाता है, और उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
विश्व गुरु बनने की राह:
संघ प्रमुख ने विश्वास जताया कि भारत निकट भविष्य में विश्व का मार्गदर्शन करेगा क्योंकि दुनिया की जटिल समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे रूढ़ियों से मुक्त हों और नियमित रूप से सद्भाव बैठकें करें ताकि आपसी गलतफहमियां दूर हो सकें।

