मां ही प्रथम गुरु: आगरा में मदर्स डे पर उमड़ा भावनाओं का सैलाब, खेलों और नृत्यों से सजी महफिल

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आगरा: ताजनगरी में ‘मातृ दिवस’ केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों और मातृ शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व बन गया। शनिवार को शहर की विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं ने इस अवसर पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिन्होंने न केवल संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि समाज को पारिवारिक एकता का संदेश भी दिया। कहीं बच्चों ने माताओं के चरण पखारकर आशीर्वाद लिया, तो कहीं महिलाओं ने अपनी प्रतिभा के रंग बिखेरे।

​अग्रमिलन महिला समिति: उत्सव और उल्लास की लहर

​कर्मयोगी एक्सटेंशन की अग्रमिलन महिला समिति द्वारा कमला नगर स्थित बीबी ग्रैंड होटल में एक भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाराज अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। यहाँ ‘मदर्स डे’ को एक उत्सव की तरह मनाया गया, जहाँ महिलाओं का स्वागत तिलक और पुष्पों से किया गया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, ​मनोरंजन और संदेश

सुहानी अग्रवाल की गणेश वंदना और सदस्याओं के सामूहिक राष्ट्रगीत ने वातावरण में देशभक्ति और भक्ति का संचार किया। महिलाओं ने न केवल नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं, बल्कि प्रश्नोत्तरी, तंबोला और विभिन्न गेम्स के जरिए खूब आनंद लिया।

मुख्य अतिथि मानसी अग्रवाल और संस्थापिका पार्षद कंचन बंसल ने कहा कि माँ समाज की वह धुरी है, जिससे पूरा परिवार और राष्ट्र प्रेरित होता है।

टीयर्स संस्थान: भावनाओं और मुस्कानों का मंच

विशेष बच्चों के लिए समर्पित टीयर्स संस्थान में मदर्स डे का आयोजन बेहद भावनात्मक रहा। यहाँ विशेष बच्चों ने अपनी माताओं के साथ मिलकर मंच साझा किया, जिसने दर्शकों की आँखों को नम कर दिया।

ममता और प्रतिभा का संगम:

बुशरा, बंटू, सनी और शिवांश जैसे नन्हे बच्चों ने ‘मेरी मां’ गीत पर हृदयस्पर्शी नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान माताओं के चेहरे पर अपने बच्चों की प्रतिभा देख गर्व और खुशी के भाव साफ झलक रहे थे।

संस्थान की निदेशिका डॉ. रीता अग्रवाल ने म्यूजिकल चेयर और बैलून रेस जैसी प्रतियोगिताओं की विजेता माताओं को पुरस्कृत किया। मुख्य अतिथि डॉ. पुष्प लता ने कहा कि विशेष बच्चों की माताओं का धैर्य और प्रेम अद्वितीय है। डॉ. रीता अग्रवाल के अनुसार, ऐसे आयोजनों से विशेष बच्चों की माताओं को समाज में एक नई पहचान और सम्मान का अनुभव होता है।

इन आयोजनों ने यह सिद्ध कर दिया कि माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संस्कारों की वह पाठशाला है जो समाज की नींव को मजबूत करती है।