नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के बीच इटावा के मौलाना जर्जिश अंसारी ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का जिक्र करते हुए दावा किया कि श्रीकृष्ण जी पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे। मौलाना यहीं नहीं रुके। उन्होंने हिंदुओं की पूजा पद्धति पर सवाल उठाया और यह भी कहा कि इस्लाम सिर्फ मुसलमानों का धर्म नहीं है, ये हिंदुओं का भी है।
मौलाना जर्जिश ने विवादास्पद बयान झारखंड में एक तकरीर के दौरान दिया है। उन्होंने श्रीकृष्ण के साथ ही भगवान राम के बारे में भी टिप्पणी की है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जो बीती 23 जून का बताया जा रहा है। हालांकि, मौलाना ने जिस श्लोक का जिक्र किया है, वह किसी भी तरह से न तो इस्लाम से जुड़ता है और न ही नमाज से। श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को आत्मसंयमित होकर योग साधना का संदेश दे रहे हैं।
मौलाना ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मौलाना जर्जिश अंसारी कहते हैं कि “हमारे भाई अगर बुरा न मानें तो कृष्ण जी भी पांचों वक्त की नमाज पढ़ा करते थे। यकीन न आए तो श्रीमद्भगवद्गीता के छठवें अध्याय का 10वां मंत्र देख लीजिए…
योगी युञ्जित सततमात्मानं रहसि स्थितः | एकाकी यतचित्तात्मा निराशिरपरिग्रहः ||”
मौलाना ने इस श्लोक का अर्थ निकालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि ईश्वर की जब पूजा करो तो पूरे शरीर का योग करो… यानी पूजा सिर्फ खड़े होकर नहीं, पूरे शरीर के साथ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हिंदू धर्म में लोग हाथ उठाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ कहते हैं। मौलाना ने आगे कहा कि हिंदू-मुस्लिम अगर अपनी किताबें पढ़ लें तो इस्लाम से मोहब्बत करने लगेंगे। ये मुसलमानों का धर्म है ही नहीं, ये उनका भी धर्म है। इसी दीन और इसी धर्म को रामचंद्र जी और श्रीकृष्ण जी ने भी पेश किया है।
असल में क्या है उस श्लोक का अर्थ?
श्रीमद्भगवद्गीता के छठवें अध्याय के 10वें श्लोक में श्रीकृष्ण जी अर्जुन को योग साधना का संदेश दे रहे हैं:
योगी युञ्जित सततमात्मानं रहसि स्थितः | एकाकी यतचित्तात्मा निराशिरपरिग्रहः ||
अर्थात- एकांत में स्थित, अकेला, चित्त और आत्मा को वश में किए हुए, कामना रहित, सामग्री के बोझ से रहित योगी अपने आपको सदा एकाग्र करता रहे। इसे सरल हिंदी में समझें तो इसका अर्थ है कि ध्यान करने वाला व्यक्ति शांत और एकांत जगह पर रहे, मन को नियंत्रित रखे, अनावश्यक इच्छाओं से दूर रहे और वस्तुओं के संग्रह (लोभ) में न फंसे। ऐसे व्यक्ति को लगातार आत्मचिंतन और ध्यान करना चाहिए (दिल्ली संस्कृत अकादमी के अनुसार)। अगर इसके आगे और पीछे के श्लोक भी देखें, तब भी मौलाना की बात कहीं से भी सिद्ध नहीं होती।
श्रीमद्भगवद्गीता के छठवें अध्याय के 9वें श्लोक का अर्थ:
सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु । साधुष्वपि च पापेषु समबुद्धिर्विशिष्यते ॥
आसान भाषा में इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति मित्र और शत्रु, अपने और पराए, अच्छे और बुरे में भेदभाव किए बिना सबके लिए भलाई की भावना रखता है, वही श्रेष्ठ योगी कहलाता है।
क्या सीख देती है श्रीमद्भगवद्गीता?
श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म के सबसे खास ग्रंथों में से एक है। यह महाभारत में भीष्म पर्व अध्याय का एक हिस्सा है। इसमें कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। जब महाभारत युद्ध शुरू होने वाला था और कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन ने अपने रिश्तेदारों, गुरुओं और मित्रों को सामने खड़ा देखा तो वे मोह, दुख और भ्रम में पड़ गए और युद्ध से इंकार करने लगे। तब अर्जुन के सारथी भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन, कर्तव्य, आत्मा, कर्म, भक्ति और मोक्ष का ज्ञान दिया था।
श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ यही संवाद श्रीमद्भगवद्गीता कहलाता है। श्रीमद्भगवद्गीता का शाब्दिक अर्थ है ‘भगवान का उपदेश’। यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार मानी जाती है।
जो भी मौलाना की जीभ काटकर लाएगा, उसे 10 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा: महामंडलेश्वर महंत विष्णु दास
मौलाना जर्जिस अंसारी के तरफ से भगवान श्रीकृष्ण पर दिए गए विवादित बयान के खिलाफ महामंडलेश्वर महंत विष्णु दास ने यह तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घोषणा की कि जो भी मौलाना की जीभ काटकर लाएगा, उसे 10 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। महंत ने मौलाना के इस कृत्य को सनातन धर्म और कृष्ण भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।
उस समय न मुस्लिम धर्म, न बौद्ध धर्म, न ईसाई धर्म, न कोई धर्म था, खाली एक सनातन धर्म था धर्मदास महाराज
अयोध्या के संत धर्मदास महाराज ने मौलाना जरजिस अंसारी के तरफ से भगवान श्रीकृष्ण को ‘मुस्लिम’ बताए जाने पर कहा कि उसको ज्ञान नहीं है। मौलाना केवल अपनी वाहवाही करने में ज्यादा बात बोल गए। पांच हजार वर्ष पहले की बात है। ये लोग 13-14 सौ वर्ष के इतिहास के मुसलमान हैं। इनका इतिहास बहुत कम है। वो लोग पहले के थे उस समय न मुस्लिम धर्म, न बौद्ध धर्म, न ईसाई धर्म, न कोई धर्म था. खाली एक सनातन धर्म था। अब इन लोगों की बात छोड़िए। यही जो कह रहे हैं मौलाना की बात का कोई महत्व नहीं है।
मौलाना जरजिस अंसारी के बयान पर सुरेंद्र राजपूत, बोले-मूखों की बात पर कोई भी टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने मौलाना जरजिस अंसारी के तरफ से भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम’ बताए जाने पर कहा कि मूखों की बात पर कोई भी टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। अब जैसे-जैसे चुनाव आते जाएंगे, भारतीय जनता पार्टी के समर्थक चाहे वो पोंगा पंडित हों और वो चाहे इस तरीके के कट्टरपंथी मौलाना हों, इस तरीके की बात करके माहौल को विषाक्त करने की कोशिश करेंगे। ऐसे लोगों के ऊपर तो कठोरता से कार्रवाई होनी चाहिए।
-एजेंसी


