बंगाल में ‘कमल’ राज का आगाज: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, पीएम मोदी रहे साक्षी

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को एक नए युग का सूत्रपात हुआ। भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। कोलकाता के विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस गौरवमयी समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। शुभेंदु ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ ग्रहण की, जिसके तुरंत बाद उन्होंने मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

​5 मंत्रियों ने भी ली शपथ, दिग्गजों का लगा जमावड़ा

शुभेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के पांच अन्य प्रमुख नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इस नई कैबिनेट में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक को शामिल किया गया है। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ एनडीए शासित राज्यों के करीब 20 मुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। पूरा आयोजन बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक बदलाव के संगम के रूप में दिखाई दिया।

​पीएम मोदी ने छुए 98 वर्षीय कार्यकर्ता के पैर

शपथ ग्रहण के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों का दिल जीत लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का विशेष सम्मान किया। पीएम ने न केवल उन्हें शॉल ओढ़ाई, बल्कि उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। बता दें कि माखनलाल सरकार 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर आंदोलन में सक्रिय रहे थे।

​शपथ से पहले पूर्वजों को किया याद

समारोह से पहले शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इसे ‘ऐतिहासिक सुबह’ बताया। उन्होंने लिखा कि आज आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के साथ हमारे संस्थापकों के सपने साकार हो रहे हैं। गौरतलब है कि शुक्रवार को अमित शाह की मौजूदगी में हुई विधायक दल की बैठक में शुभेंदु को सर्वसम्मति से नेता चुना गया था।

ममता के 15 साल के शासन का अंत

4 मई को आए चुनावी नतीजों ने बंगाल की सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल दी थी। भाजपा ने 293 में से 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि 15 साल से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। इस जीत के साथ ही बंगाल में ‘परिवर्तन’ का वह नारा सच साबित हुआ जो भाजपा ने चुनाव के दौरान दिया था।