आईयूसीएन (IUCN) की 11 दुर्लभ प्रजातियों ने बढ़ाया जोधपुर झाल का गौरव; सारस क्रेन और ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क का दिखा जलवा

Regional

मथुरा/आगरा। ब्रज तीर्थ विकास परिषद के संरक्षण और वन विभाग की सतत निगरानी का सकारात्मक असर अब जोधपुर झाल वेटलैंड पर स्पष्ट नजर आने लगा है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस–2026 के तहत रविवार को हुई जलीय पक्षियों की गणना में यहां कुल 1493 पक्षी दर्ज किए गए। लगातार छठे वर्ष हुई गणना में इस बार रिकॉर्ड 72 प्रजातियां सामने आईं, जिनमें आईयूसीएन सूची की 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि ब्रज क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।

छठे वर्ष की गणना में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

मथुरा जनपद के फरह क्षेत्र के समीप स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड पर आगरा मंडल की चार प्रमुख नमभूमियों की गणना का शुभारंभ किया गया। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित इस वेटलैंड की देखरेख वन विभाग द्वारा की जा रही है। एशियन वॉटरबर्ड सेंसस के अंतर्गत यह लगातार छठा वर्ष रहा, जिसमें अब तक की सर्वाधिक प्रजातियां दर्ज होने से वेटलैंड प्रबंधन की सफलता भी सामने आई है।

80 हेक्टेयर क्षेत्र में तीन घंटे चला सर्वे अभियान

गणना वेटलैंड इंटरनेशनल के उत्तर प्रदेश कॉर्डिनेटर नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई।

टीम में डॉ. अमोल शिरोमणि, पलक गुप्ता, निधि यादव, अनुज यादव, अनुज परिहार, आकांक्षा, डॉ. राहुल गुप्ता, अदनान, अमित दिवाकर, विनोद, अनुराग पचैरा, उदय, बलवंत और जीतू शामिल रहे। दो समूहों में बंटी 8 विशेषज्ञ सदस्यों की टीम ने करीब 3 घंटे में लगभग 80 हेक्टेयर क्षेत्र का गहन सर्वे किया।

32 प्रवासी और 40 स्थानीय प्रजातियां दर्ज

गणना में कुल 72 प्रजातियों की पहचान हुई, जिनमें 32 प्रवासी और 40 स्थानीय जलीय पक्षी शामिल रहे। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है, जो वेटलैंड पर बेहतर संरक्षण, अनुकूल वातावरण और सुरक्षित आवासीय परिस्थितियों को दर्शाती है।

इन प्रजातियों की संख्या रही सबसे अधिक

जोधपुर झाल पर इस बार सर्वाधिक संख्या में बार-हेडेड गूज – 387, नॉर्दर्न पिनटेल – 249, कॉमन टील – 184, इसके अलावा गेडवाल, यूरेशियन विजन, नॉर्दर्न शोवलर, पाइड एवोसेट, लिटिल स्टिंट, टेमिनिक स्टिंट, सैंडपाइपर, वैगटेल, ब्लैक-विंग स्टिल्ट, पर्पल स्वैम्प हेन और कॉमन स्नाइप जैसी प्रजातियां भी रिकॉर्ड की गईं।

आईयूसीएन की 11 संकटग्रस्त प्रजातियां भी मिलीं

इस वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि आईयूसीएन की संकटग्रस्त सूची में शामिल 11 प्रजातियां जोधपुर झाल पर दर्ज की गईं। इनमें सारस क्रेन, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, कॉमन पोचार्ड, वूली-नेक्ड स्टॉर्क, ब्लैक-टेल्ड गोडविट, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, रिवर टर्न, फेरुजिनस पोचार्ड और ब्लैक-हेडेड आइबिस शामिल हैं।

वन विभाग की निगरानी से बढ़ी पक्षियों की आमद

आगरा वृत के मुख्य वन संरक्षक अनिल पटेल के अनुसार वन विभाग की निरंतर निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय दखल पर नियंत्रण के चलते प्रवासी पक्षियों पर संकट घटा है, जिससे उनकी संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

नमभूमि विस्तार से मजबूत हुई जैव विविधता

पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड पर नमभूमि क्षेत्र का विस्तार कर नए जलीय हैबिटेट विकसित किए गए हैं। इसका परिणाम यह रहा कि वेटलैंड पर निर्भर पक्षियों की प्रजातियों और संख्या दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण और निगरानी जारी रही, तो आने वाले वर्षों में जोधपुर झाल वेटलैंड देश के प्रमुख पक्षी स्थलों में और मजबूत पहचान बना सकता है।