मुंबई: भारत का फाउंड्री (ढलाई) उद्योग विकसित भारत @2047 के सपने को साकार करने के लिए तैयार है। इंडियन फाउंड्री कांग्रेस ऑफ इंडिया (IFCI) द्वारा जारी ‘भारत फाउंड्री 360 डिग्री इनसाइट 2025–2047’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत का यह सेक्टर अब एक ऐतिहासिक छलांग लगाने जा रहा है। वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कास्टिंग उत्पादक होने के नाते, भारत ने अब वैश्विक शीर्ष तीन बाजारों में अपनी स्थायी जगह बनाने का लक्ष्य रखा है।
आंकड़ों में विकास की रफ्तार
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में 23.6 अरब डॉलर मूल्य का यह उद्योग 2029 तक बढ़कर 42.5 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। यह 9.4% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। अनुमान है कि 2047 तक यह सेक्टर 169 अरब डॉलर के जादुई स्तर को छू लेगा।
रोजगार और उत्पादन का आधार
उत्पादन: भारत वर्तमान में सालाना 12 मिलियन टन कास्टिंग उत्पादित करता है, जो दुनिया के कुल उत्पादन का 11% है।
नेटवर्क: देशभर में लगभग 4,500 फाउंड्री इकाइयां सक्रिय हैं।
रोजगार: यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 लाख से अधिक लोगों की आजीविका का जरिया बना हुआ है।
तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ का बूस्ट
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से बढ़ती मांग ने इस उद्योग को नई ऊर्जा दी है। पीएलआई (PLI) योजना और इंडस्ट्री 4.0 के तहत एआई (AI), रोबोटिक्स और 3डी प्रिंटिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर भारतीय फाउंड्री अब उच्च-मूल्य और टिकाऊ उत्पादन की ओर बढ़ रही है।
मुंबई में 12 से 14 फरवरी तक आयोजित IFE-X 2026 और 74वीं इंडियन फाउंड्री कांग्रेस ने इस परिवर्तन को और मजबूती दी है, जो भारत को वैश्विक फाउंड्री नेतृत्व की दिशा में अग्रसर कर रहा है।
-अनिल बेदाग

