यूपी के सरकारी डॉक्टरों के लिए खुशखबरी: ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात 150 डॉक्टर करेंगे पीजी कोर्स, 10 साल सेवा का देना होगा बॉन्ड

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) के तहत प्रदेश के बेहद दुर्गम, पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे लगभग डेढ़ सौ एमबीबीएस डॉक्टर जल्द ही एमडी (MD), एमएस (MS) और डीएनबी (DNB) जैसे उच्चस्तरीय परास्नातक (पीजी) कोर्स करेंगे। हालांकि, इन डॉक्टरों को कोर्स पूरा करने के बाद विशेषज्ञ (स्पेशलिस्ट) के रूप में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगातार 10 वर्षों तक अनिवार्य रूप से अपनी सेवाएं देनी होंगी। यदि कोई डॉक्टर इस शर्त का उल्लंघन करता है या सेवा देने से इनकार करता है, तो उसे 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि राजकीय कोष (सरकारी राजस्व) में जमा करानी होगी।

​3 साल की ग्रामीण सेवा और 45 वर्ष से कम आयु पर मिलेगा भारांक (वेटेज)

​प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) के अंतर्गत दुर्गम व अति पिछड़े जिलों के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत एमबीबीएस डॉक्टरों को पीजी कोर्स में दाखिले के लिए विशेष भारांक (वेटेज) प्रदान किया जाता है। यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुविधा केवल उन्हीं डॉक्टरों को मिलती है, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम तीन वर्षों तक निरंतर सेवाएं दी हैं। इसके साथ ही, इस योजना का लाभ उठाने के लिए डॉक्टर की आयु 45 वर्ष से कम होना अनिवार्य शर्त रखी गई है।

हाल ही में नीट पीजी (NEET PG) का परिणाम घोषित होने के बाद, ऐसे अर्ह डॉक्टरों को एमडी, एमएस और डीएनबी पाठ्यक्रमों की आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने की आधिकारिक अनुमति प्रदान कर दी गई है।

स्वास्थ्य महानिदेशालय से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 140 पात्र डॉक्टरों ने इस संबंध में अनुमति पत्र (एनओसी के लिए) प्राप्त कर लिया है। अनुमति पत्र हासिल करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर निर्धारित की गई है, ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार नीट पीजी के जरिए पीएमएस संवर्ग के 150 से भी अधिक डॉक्टर काउंसलिंग में शामिल होकर उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेंगे।

​एनओसी के साथ भरना होगा 1 करोड़ रुपये का बॉन्ड और दो विभागीय जमानतदार

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के तहत डॉक्टरों को पीजी कोर्स में दाखिला लेने से पूर्व विभाग से औपचारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। एनओसी जारी कराए जाते समय ही डॉक्टरों से एक कड़ा कानूनी बॉन्ड भरवाया जाएगा।

​इस बॉन्ड के तहत स्पष्ट नियम तय किया गया है कि विशेषज्ञता का प्रशिक्षण पूरा करने के उपरांत डॉक्टरों को अगले 10 वर्षों तक उत्तर प्रदेश के राजकीय चिकित्सालयों में ही अपनी सेवाएं देनी होंगी। यदि कोई चिकित्सक इस अवधि से पूर्व सेवा छोड़ता है, तो उसे 1 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि सरकारी खजाने में जमा करनी होगी। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने के लिए बॉन्ड पत्र के साथ दो विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों को बतौर जमानतदार (गारंटर) भी प्रस्तुत करना होगा। इस व्यवस्था से प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी को दूर करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।