नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026” लागू कर दिए हैं। इन नियमों को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और कुछ वर्गों में नाराजगी भी सामने आने लगी है।
यूजीसी की नई गाइडलाइंस में ओबीसी को भी एससी/एसटी के साथ जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। इसे लेकर सामान्य वर्ग के कुछ छात्रों और संगठनों का कहना है कि यह गाइडलाइन एकतरफा है और इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यूजीसी के अनुसार ये नियम 15 जनवरी 2026 से देशभर के सभी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू हो चुके हैं। नियमों के प्रावधान सख्त होने के कारण कई लोगों को आशंका है कि इसका सही इस्तेमाल कम और बदले की कार्रवाई के रूप में दुरुपयोग ज्यादा हो सकता है।
ड्राफ्टिंग कमेटी में कौन शामिल था
यूजीसी की ड्राफ्टिंग कमेटी आयोग के अंदरूनी विशेषज्ञों और कमीशन मेंबर्स से बनी थी। इसकी अगुवाई तत्कालीन यूजीसी चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी ने की थी।
नई गाइडलाइंस की मुख्य बातें
यूजीसी की ओर से जारी नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा। इस कमेटी में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग (PwD) और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
गाइडलाइंस में जाति-आधारित भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को शामिल किया गया है।
शिकायतों के लिए 24×7 हेल्पलाइन और समय-सीमा भी तय की गई है। शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करनी होगी और 60 दिनों में जांच पूरी करनी होगी।
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित संस्थान की मान्यता रद्द की जा सकती है या यूजीसी द्वारा मिलने वाली फंडिंग रोकी जा सकती है। ये नियम वर्ष 2012 के पुराने नियमों का अपडेट बताए जा रहे हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू किया गया था।
शिकायत होने पर छात्र पर क्या कार्रवाई होगी
यूजीसी के नए नियमों के तहत यदि किसी छात्र पर जातिगत भेदभाव की शिकायत होती है तो इक्विटी कमेटी जांच करेगी और रिपोर्ट संस्थान प्रमुख को सौंपेगी। इसके बाद आरोपी छात्र के खिलाफ संस्थागत स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसमें चेतावनी, जुर्माना, निलंबन या निष्कासन जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। शिकायत ऑनलाइन, लिखित, ईमेल या 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज की जा सकेगी।
कमेटी शिकायत मिलते ही जल्द बैठक करेगी और गंभीर मामलों में पुलिस को भी सूचना दी जा सकती है। निर्णय से असंतुष्ट पक्ष 30 दिनों के भीतर ऑम्बड्सपर्सन के पास अपील कर सकेगा।
हल्के मामलों में परामर्श या चेतावनी दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में छात्रावास से हटाना, परीक्षा से वंचित करना या संस्थान से निष्कासित करने तक की कार्रवाई संभव होगी। इसके साथ ही संस्थानों को सभी शिकायतों का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य किया गया है।

