विकास से नहीं, तिकड़म से जीते जाते हैं चुनाव…बीजेपी विधायक श्याम प्रकाश का ‘सीक्रेट’ मंत्र वायरल

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में हरदोई के गोपामऊ से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्याम प्रकाश के एक हालिया बयान ने जोरदार सियासी हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर विधायक का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने चुनाव जीतने के जिस ‘सीक्रेट’ का खुलासा किया है, उसने न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया है, बल्कि खुद उनकी पार्टी के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। विधायक का दावा है कि चुनाव विकास के दम पर नहीं, बल्कि राजनीतिक चालबाजियों और सटीक रणनीति के बल पर जीते जाते हैं।

​क्या है पूरा मामला?

यह बयान हरदोई जिले के टड़ियावां ब्लॉक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया। अवसर था ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में छह महीने की वृद्धि पर आयोजित एक सम्मान समारोह का। इस मंच से जनसमूह को संबोधित करते हुए विधायक श्याम प्रकाश ने अपनी ही कार्यशैली और चुनावी अनुभवों पर एक चौंकाने वाली टिप्पणी कर दी।

विधायक ने कहा, “हमने विकास कार्यों के जरिए चुनाव जीतने का प्रयोग कई बार करके देखा है। जिन क्षेत्रों में हमने पक्की सड़कें और अन्य निर्माण कार्य करवाए, चुनाव के समय जब वहां के मतपेटियां खुलीं, तो परिणाम उम्मीद के विपरीत थे और हमें वहां से अपेक्षित वोट नहीं मिले।”

उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि यह कड़वा सच है कि चुनाव केवल विकास के भरोसे नहीं, बल्कि राजनीतिक तिकड़म और जोड़-तोड़ से ही जीते जा सकते हैं।

​’साम, दाम, दंड, भेद’ का मंत्र

विधायक महोदय अपनी बात पर यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने वहां उपस्थित प्रधानों को आने वाले पंचायत चुनावों के लिए जीत का ‘अनोखा’ नुस्खा भी थमा दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनावी तैयारियों में अभी से जुट जाना चाहिए। जीत सुनिश्चित करने के लिए ‘साम, दाम, दंड, भेद’ यानी हर संभव हथकंडे अपनाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि तिकड़म चाहे जो भी अपनानी पड़े, लेकिन चुनाव हर हाल में जीतना जरूरी है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने प्रधानों को सरकार के साथ समन्वय बनाकर काम करने की सलाह भी दी, ताकि विकास की गति बनी रहे और सरकार का विश्वास भी हासिल हो सके।

​सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में बहस

विधायक का यह बेबाक बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष इसे बीजेपी की चुनावी संस्कृति और उनकी जमीनी रणनीति का खुला सच बताकर हमलावर है। वहीं दूसरी ओर, पार्टी के लिए अपने ही नेता के इस विवादास्पद बयान का बचाव करना और उस पर स्पष्टीकरण देना एक कठिन चुनौती बन गया है। इस प्रकरण ने एक बार फिर चुनावी राजनीति में विकास बनाम ‘तिकड़म’ के पुराने मुद्दे को चर्चा के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।