आगरा में शास्त्रीय नृत्य की दिव्य गूँज: वृंदा बंसल के अरंगेत्रम ने बिखेरी भरतनाट्यम की अलौकिक आभा

विविध

आगरा: ताजनगरी के फतेहाबाद रोड स्थित ‘कलाकृति सभागार’ शनिवार को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और गुरु-शिष्य परंपरा की दिव्यता का साक्षी बना। सुश्री वृंदा बंसल के भरतनाट्यम ‘अरंगेत्रम’ समारोह ने न केवल दर्शकों को भाव-विभोर किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई से भी साक्षात्कार कराया। कला, अध्यात्म और कठिन साधना के इस समन्वय ने आगरा के सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

​मंच पर जीवंत हुई देवाधिदेव और कृष्ण की स्तुति

समारोह का केंद्र बिंदु वृंदा बंसल की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां रहीं। उन्होंने पुष्पांजलि और नटराज स्तुति से कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। इसके पश्चात अलारिप्पु, जातिस्वरम्, कृष्ण शब्दम् और कार्तिकेय वर्णम् जैसी कठिन प्रस्तुतियों में अपने पद-संचालन और भावों से समां बांध दिया। विशेष रूप से ‘भो शम्भो’ और ‘श्रीराम स्तुति’ के दौरान वृंदा के अभिनय और मुद्राओं ने दर्शकों को आध्यात्मिक चेतना के चरम पर पहुँचा दिया।

​सुधा चंद्रन और दिग्गजों ने बढ़ाया उत्साह

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात नृत्यांगना एवं अभिनेत्री सुधा चंद्रन मौजूद रहीं। उन्होंने वृंदा की सराहना करते हुए कहा, “इतनी कम उम्र में मंच पर ऐसी परिपक्वता और अनुशासन विरल है। वृंदा जैसी युवा प्रतिभाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का उज्ज्वल भविष्य हैं।” वहीं, पदम्श्री पल्लवी शर्मा ने कहा कि वृंदा ने सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा और कला एक साथ मिलकर व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में विख्यात ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

​आईआईएम अहमदाबाद की छात्रा और कुशल नृत्यांगना

आगरा के आकाश बंसल और शालिनी बंसल की पुत्री वृंदा बंसल बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। सिंधिया कन्या विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा और शहीद सुखदेव कॉलेज से स्नातक के बाद वर्तमान में वे IIM अहमदाबाद में प्रबंधन की पढ़ाई कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में शिखर छूने के साथ-साथ शास्त्रीय कला के प्रति उनका यह समर्पण नई पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

संगीत और गुरुओं का सानिध्य

वृंदा ने यह मुकाम अपनी गुरु कविता पिल्लई, गुरु जिग्नेश सुराणी और गुरु सी.एस. आंचल जैन के मार्गदर्शन में वर्षों की कठोर तपस्या के बाद हासिल किया है। समारोह के अंत में गुरु कविता पिल्लई ने उन्हें ‘अरंगेत्रम प्रमाण-पत्र’ प्रदान किया। कार्यक्रम को नट्टुवांगम् पर जिग्नेश सुराणी, गायन में विध्या श्रीनिवासन और मृदंगम् पर श्रीनिवासन जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी संगति से और भी भव्य बना दिया।

​गणमान्य जनों की उपस्थिति

इस अवसर पर विजय बंसल, सीताराम बंसल, शास्त्रीय संगीत गुरु गजेन्द्र सिंह चौहान, कथक गुरु ज्योति खंडेलवाल और शहर के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन सोनिया मित्तल एवं गरिमा अग्रवाल ने किया।