महापौर की शिकायत पर सीएम योगी का एक्शन: आगरा में गलत जगह सड़क बनाने वाले अधिकारियों पर लटकी तलवार

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आगरा: ताजनगरी के हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी जाने वाले मार्ग के निर्माण में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को की गई शिकायत के बाद शासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने विस्तृत तकनीकी जांच के बाद नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग के कई अधिकारियों और कार्यदायी फर्मों को दोषी पाते हुए शासन को सख्त विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भेज दी है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग के चौड़ीकरण और ब्लैक टॉपिंग के लिए ₹53.92 लाख और साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के लिए ₹79.37 लाख स्वीकृत किए गए थे। प्रक्रिया ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी की गई थी, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती गई। जांच में खुलासा हुआ कि सड़क का निर्माण स्वीकृत स्थल पर करने के बजाय करीब 1 किलोमीटर दूर महज 25 मीटर के दायरे में कर दिया गया। साथ ही, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

हालांकि, प्रारंभिक रूप से जिस बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही थी, जांच में मामला मुख्य रूप से स्वीकृत स्थल से हटकर काम कराने और तकनीकी लापरवाही का निकला। सरकारी धन के दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त ने त्वरित एक्शन लिया है।

​फर्मों पर जुर्माना और अंतिम चेतावनी

नगर आयुक्त ने मेसर्स अक्षत कंस्ट्रक्शन और मेसर्स एसके विरानी पर आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया है। दोनों फर्मों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति हुई तो उन्हें तत्काल ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

​लापरवाह इंजीनियरों पर गाज

नगर आयुक्त की रिपोर्ट में इंजीनियरिंग स्टाफ की भूमिका को संदिग्ध और गैर-जिम्मेदाराना माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्क सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता ने मौके पर सही निगरानी नहीं की और उच्च अधिकारियों को भ्रामक सूचनाएं दीं। इस मामले में अवर अभियंता पवन कुमार, सहायक अभियंता एसएन सिंह और रविन्द्र कुमार सिंह को सीधे तौर पर दोषी माना गया है। साथ ही, पर्यवेक्षण में विफल रहने पर अधिशासी अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन सभी के विरुद्ध कड़ी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को सिफारिश भेजी गई है।