नियमों का चश्मा और संवेदनहीन व्यवस्था: जब दृष्टिबाधित बच्चों पर सबसे पहले चला डंडा

आगरा में शिक्षा विभाग ने जब “कानून का चश्मा” पहनने का फैसला किया, तो उम्मीद थी कि अब फर्जी स्कूलों, अवैध कॉलेजों और शिक्षा के नाम पर चल रही दुकानों पर कार्रवाई होगी। लेकिन अफसोस, यह चश्मा भी उसी तरह निकला, जैसा अक्सर हमारे सिस्टम में होता है—कुछ को साफ दिखाने वाला और कुछ को […]

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‘राम के नाम पर गरीबों को सजा’: मनरेगा की जगह नए कानून की तैयारी, गांधी नाम हटाने पर सियासी घमासान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त कर उसकी जगह नया रोजगार कानून लाने की तैयारी को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि प्रस्तावित कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाया जा रहा है और इसके जरिए राज्यों व गरीबों पर अतिरिक्त बोझ डाला जाएगा। विपक्ष ने इसे “रोजगार के […]

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हरियाणा में टोल की मार: सबसे कम दूरी…सबसे ऊँची वसूली; व्यवस्था पर ठोस सवाल

जब गुजरात जैसा बड़े आकार वाला प्रदेश पीछे रह जाए और छोटा हरियाणा टोल वसूली में सबसे आगे हो—तो यह महज संयोग नहीं, नीतिगत असंतुलन का संकेत है लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में वह सच सामने आया जिसे हरियाणा के लोग वर्षों से महसूस कर रहे थे—टोल की बढ़ती बोझिल मार, […]

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अरावली की सिकुड़ती ढाल और दिल्ली का डूबता पर्यावरण

अरावली संरक्षण के दायरे को 100 मीटर की परिभाषा से सीमित कर देना—दिल्ली-एनसीआर की हवा, पानी और तापमान के लिए एक गहरी पर्यावरणीय चोट। भारत के उत्तरी भूगोल में अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि एक जीवित पारिस्थितिक दीवार, एक भूजल भंडार, एक शीतलन तंत्र और एक धूल-रोधी प्राकृतिक ढाल के रूप में जानी जाती […]

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धुंध में घिरा उत्तर भारत: यमुना मदद की पुकार में, दिल्ली के सत्ता गलियारों में अब भी सन्नाटा

उत्तर भारत इस समय घने कोहरे और जहरीली हवा की चादर में लिपटा है। कई शहरों में हालात इतने गंभीर हैं कि सुबह की धुंध के बीच ताजमहल तक धुंधला पड़ जाता है। सांस लेते ही सीने में जलन महसूस होती है, और इसके पीछे खड़ी है लगातार बिगड़ती हवा और तेजी से मरती यमुना […]

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सड़को पर मौत की रफ्तार, सड़क सुरक्षा पर गाल बजाती सरकार

भारत की सड़कों पर हर दिन लगभग चार सौ लोग अपनी जान गंवाते हैं। यह आँकड़ा किसी आपदा या महामारी से नहीं, बल्कि हमारी सड़कों पर व्याप्त अव्यवस्था और लापरवाही से जुड़ा है। अनेक योजनाएँ, अभियान और कानून बनने के बावजूद भारत आज भी दुनिया के सबसे अधिक सड़क दुर्घटना मृत्यु दर वाले देशों में […]

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सवालों के घेरे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

विश्व राजनीति की अशांत मिट्टी पर खड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का नैतिक व संस्थागत आधार आज पहले से कहीं अधिक प्रश्नों से घिरा है। जब युद्ध बढ़ते जा रहे हैं, तब शांति का सबसे बड़ा संरक्षक स्वयं अपनी भूमिका सिद्ध करने में असफल दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 1945-आधारित संरचना […]

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सड़क पर कफ़न बुनती सफ़ेद लाइट: सड़क हादसों की अनकही कहानी…

रात में तेज़ सफ़ेद हेडलाइट्स सिर्फ़ आँखों को नहीं, बल्कि जीवन को भी चौंधिया देती हैं। हर साल हजारों लोग इसके कारण हादसों में मरते हैं। यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे परिवारों की टूटी ज़िंदगी है। समाधान आसान है – पीली हेडलाइट लगाएँ, तेज़ सफ़ेद लाइट से बचें, सरकार नियम बनाए और आम […]

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यूपी में दीपावली पर 1,000 करोड़ की शराब गटक गए पियक्कड़, लखनऊ में 50 करोड़ की बिक्री

आगरा शहर में नशे का उत्पात: सामाजिक कार्यकर्ता ने ठेकों को आबादी से हटाने की मांग की

आगरा। न्यू आगरा थाना क्षेत्र के नगला बूढ़ी में बेकाबू कार से सात लोगों के कुचले जाने और पांच की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। यह हादसा सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि शहर में फैल चुके नशे के खुले उत्पात और प्रशासनिक लापरवाही की एक भयावह मिसाल बनकर सामने आया है। […]

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द वर्निंग बस- आखिर हादसों पर मौन क्यों…???

देश के हाईवे अब सफ़र के नहीं, लाशों के रास्ते बनते जा रहे हैं। ताज़ा घटना मध्यप्रदेश के शिवपुरी–इंदौर मार्ग की है, जहाँ अशोकनगर के पास एक बस में अचानक आग लग गई। संयोग से घटना का समय नींद का नही था लिहाजा यात्रियों की जान तो बच गई, पर उनका समान,लगेज राख में बदल […]

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