भारतीय रणनीति और पड़ोसी देशों की उथल-पुथल, दक्षिण एशिया की अस्थिरता और भारत की चुनौतियाँ

दक्षिण एशिया इस समय राजनीतिक अस्थिरता की चपेट में है। नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और मालदीव में हालिया घटनाओं ने भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर सीधा प्रभाव डाला है। चीन और अमेरिका अपनी-अपनी टूलकिट के जरिए क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं। भारत के लिए केवल प्रतिक्रियात्मक नीति पर्याप्त नहीं है; उसे कूटनीतिक सक्रियता, […]

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वामपंथी सोच और भारतीय संस्कृति: समृद्धि या विकृति?

भारत, एक ऐसा देश जहां संस्कृति, धर्म, कला, और साहित्य की जड़ें सदियों से फैली हुई हैं, आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यह देश विविधताओं में एकता का प्रतीक है, और इसकी सांस्कृतिक धरोहर विश्वभर में प्रशंसा पाती है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, वामपंथी विचारधारा ने भारतीय समाज के कई पहलुओं पर […]

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हिंदी दिवस का संदेश: भाषा से जुड़ता है समाज और संस्कृति, मातृभाषा में शिक्षा ही वास्तविक राष्ट्रनिर्माण का मार्ग

मातृभाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति से जुड़ाव का माध्यम है। नई शिक्षा नीति (2020) ने कक्षा 5 तक मातृभाषा में शिक्षा पर बल दिया है, जिससे बच्चों की समझ, आत्मविश्वास और भागीदारी बढ़ेगी। अंग्रेज़ी का महत्व अपनी जगह है, परंतु प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही सबसे प्रभावी है। चुनौतियों […]

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हिंदी दिवस: एक दिवस में क्यों बंधे, हिन्दी का अभियान। रचे बसे हर पल रहे, हिन्दी हिन्दुस्तान

हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव न रह जाए, बल्कि यह हमारी चेतना और जीवन का स्थायी हिस्सा बने। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मगौरव की पहचान है। यदि हम अपने घर, शिक्षा, तकनीक और कार्यस्थल पर हिंदी को सहजता से अपनाएँ, तभी इसका वास्तविक विस्तार संभव होगा। अंग्रेज़ी सीखना […]

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सोशल मीडिया: एक अदृश्य बारूद का ढेर, जिस पर बैठी है हमारी युवा पीढ़ी!

आगरा: नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक पड़ोसी देश की आंतरिक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी चेतावनी है, जिसकी गूंज हमारे घरों और हमारे समाज तक पहुंच रही है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में सड़कों पर उतरे युवाओं और बच्चों पर हुई पुलिस कार्रवाई में […]

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भारतीय शिक्षा और एआई: मुक्तिदायी या बंधनकारी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय शिक्षा के सामने दो राहें खोलती है। एक ओर यह शिक्षक को कागज़ी काम और दोहरावदार कार्यों से मुक्त कर सकती है, जिससे वह संवाद और मार्गदर्शन पर ध्यान दे सके। दूसरी ओर यह खतरा भी है कि शिक्षक महज़ “तकनीकी-प्रबंधक” बन जाए और शिक्षा का मानवीय सार खो जाए। भारत के […]

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शहरीकरण और सामाजिक संकट: भीड़ में बढ़ता अकेलापन

सबसे बड़ी चुनौती है सामुदायिक बंधनों का क्षरण। गाँवों में जहाँ पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बीच गहरे संबंध होते हैं, वहीं शहरों में रहने वाले लोग अक्सर अनजानेपन और दूरी का अनुभव करते हैं। गेटेड सोसाइटी और उच्च-आय वर्गीय कॉलोनियों ने सामाजिक जीवन को खंडित कर दिया है। लोग अपने छोटे-से घेरे में सिमट जाते […]

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हिमालय के रहस्यमयी खोजी की 200वीं पुण्यतिथि: विलियम मूरक्रॉफ्ट की अनसुलझी धरोहर पर महत्वपूर्ण संगोष्ठी

हिमालय की गहराइयों और इतिहास के रहस्यों से जुड़े ब्रिटिश खोजी विलियम मूरक्रॉफ्ट की 200वीं पुण्यतिथि पर पहाड़ संस्था ने एक विशेष ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और दस्तावेजों से जुड़े अनुत्तरित प्रश्नों पर विद्वानों ने गहन विमर्श किया। पहाड़ संस्था का ऑनलाइन आयोजन नैनीताल स्थित पहाड़ संस्था (People’s Association for Himalayan […]

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भारत की चिप क्रांति: छलावा या हकीकत?

भारत में चिप क्रांति का सपना बड़ा दिखाया जा रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह महज भाषणों और दावों तक ही सीमित है? प्रधानमंत्री के घोषणाओं में जो स्वदेशी चिप, ‘विक्रम’ लॉन्च की गई, वह तकनीकी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उससे जुड़े बड़े सवाल और असफलताएं उजागर होती हैं, जिन्हें सरकार […]

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खतरनाक मौसम में भी स्कूल खुले क्यों?

“बच्चों की सुरक्षा बनाम औपचारिकता का सवाल: जर्जर स्कूल भवन, प्रशासन की संवेदनहीनता और बाढ़-गंदगी के बीच पढ़ाई नहीं, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता – आपदा में भी आदेशों की राजनीति क्यों?” बारिश और बाढ़ की स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनकी जान से खिलवाड़ है। जर्जर इमारतें, गंदगी, जलभराव और यातायात […]

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