लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए ‘ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित’ गठजोड़ का नया खाका खींचा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मायावती इस बार प्रदेश की 40 से 50 सीटों पर ब्राह्मण चेहरों को चुनावी मैदान में उतार सकती हैं। इसकी औपचारिक शुरुआत जालौन की माधौगढ़ सीट से हो चुकी है, जहाँ आशीष पांडेय को विधानसभा प्रभारी (संभावित प्रत्याशी) घोषित किया गया है।
बसपा की नई रणनीति के 3 मुख्य स्तंभ:
सोशल इंजीनियरिंग 2.0: 2007 की तर्ज पर पार्टी फिर से ब्राह्मण और सवर्णों को उचित प्रतिनिधित्व देकर सत्ता वापसी की राह देख रही है। मायावती ने स्पष्ट किया है कि ब्राह्मणों को केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, बल्कि ‘रोजी-रोटी और सत्ता में भागीदारी’ चाहिए।
प्रभारी ही बनेगा प्रत्याशी: बसपा की कार्यप्रणाली के अनुसार, जिस व्यक्ति को विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया जाता है, वही अंततः प्रत्याशी होता है। वर्तमान में प्रत्येक सीट पर 4-4 दावेदारों का पैनल बनाकर उनकी जमीनी पकड़ जांची जा रही है।
मुस्लिम-दलित समीकरण: संगठन के माध्यम से मुस्लिमों को जोड़कर और अपने कैडर (दलित) वोट बैंक को सहेजकर बसपा एक त्रिकोणीय मुकाबला बनाने की कोशिश में है।
संगठन में बड़ा फेरबदल: नौशाद अली को मिली कमान
पार्टी ने चुनावी मशीनरी को सक्रिय करने के लिए वरिष्ठ नेता नौशाद अली का कद बढ़ाया है। उन्हें प्रदेश के चार महत्वपूर्ण मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
कानपुर मंडल (27 सीटें)
आगरा मंडल
मेरठ मंडल
लखनऊ मंडल
होली के बाद बड़ी घोषणाएं: नौशाद अली और मायावती के बीच हुई लंबी वार्ता के बाद यह तय हुआ है कि होली के तुरंत बाद कानपुर मंडल की 10 महत्वपूर्ण सीटों पर प्रभारियों के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। कानपुर मंडल की 27 सीटों में से अधिकांश पर ब्राह्मण या सवर्ण प्रत्याशी उतारने की योजना है।
जातीय समीकरण और यूजीसी विवाद का असर
हाल ही में यूजीसी (UGC) के नियमों और आरक्षण को लेकर छिड़ी बहस ने सवर्ण राजनीति को हवा दी है। विपक्षी दलों का मानना है कि इस मुद्दे पर सवर्णों में नाराजगी है, जिसे बसपा भुनाने की कोशिश कर रही है। जालौन की माधौगढ़ सीट, जो कभी बसपा का गढ़ रही है, वहां आशीष पांडेय की घोषणा इसी दिशा में पहला बड़ा कदम है।

