आगरा में 1.69 करोड़ रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाकर सरकार को लगाया चूना, दो पार्टनरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे जीएसटी (GST) पंजीकरण कराकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। राज्य कर विभाग की आधिकारिक शिकायत के आधार पर लोहामंडी थाने में ‘एमएस कैलाशपति एंटरप्राइजेज’ (MS Kailashpati Enterprises) नामक फर्म के दो प्रमुख पार्टनरों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

​कैसे खुला फर्जीवाड़े का पूरा खेल?

​मीडिया रिपोर्ट्स और विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य कर उपायुक्त (खंड-14) राहुल कुमार द्विवेदी की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने फर्म के पार्टनर सुमित सिंह (निवासी विवेकानंद पुरम, शास्त्रीपुरम) और विपिन सिंह (निवासी गणपति स्मार्ट सिटी, सिकंदरा) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस फर्म का पंजीकृत पता फर्स्ट फ्लोर, फ्लैट एफ-103, कोमल अपार्टमेंट, लोहिया नगर, बल्केश्वर दर्शाया गया था।

​विभाग के मुताबिक, आरोपियों ने टेक्सटाइल फैब्रिक, बटन और प्रेस-फास्टनर्स के कारोबार का हवाला देते हुए 1 सितंबर, 2022 को जीएसटी का पंजीकरण हासिल किया था। हालांकि, जब विभाग को इस संबंध में शिकायत मिली तो 8 फरवरी, 2023 को विभागीय टीम ने बताए गए पते पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया। जांच के दौरान मौके पर उक्त नाम की कोई फर्म अस्तित्वहीन पाई गई, जिसके बाद प्राधिकरण ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 सितंबर, 2022 से ही इसका रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया था।

​कागजों में खरीद दिखाकर पास की गई 1.69 करोड़ की आईटीसी (ITC)

जांच के दायरे में यह बात सामने आई कि सितंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच इस फर्जी फर्म द्वारा बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त के केवल कागजों में ही भारी-भरकम खरीदारी दिखाई गई। इसके जरिए कुल 1.69 करोड़ रुपये से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल की गई और उसे अन्य फर्मों को पास ऑन कर दिया गया। इस कुल राशि में 84.92 लाख रुपये का केंद्रीय जीएसटी (CGST) और इतनी ही राशि का राज्य जीएसटी (SGST) शामिल है।

​आईटीसी क्लेम करने के लिए जिन अन्य संदिग्ध फर्मों से खरीद दिखाया जाना दर्शाया गया था, उनमें प्रमुख रूप से मीनल ट्रेडिंग कंपनी, बुधप्रीत कॉटन एलएलपी और पाखी निट फैब शामिल थीं। विभाग की शुरुआती छानबीन में मीनल ट्रेडिंग कंपनी का जीएसटी पंजीकरण भी पूरी तरह फर्जी पाया गया, जबकि अन्य दो फर्मों के पंजीकरण भी बाद में विभाग द्वारा निरस्त किए जा चुके हैं।

​पुलिस जांच शुरू, खंगाले जा रहे डिजिटल रिकॉर्ड

​इस पूरे मामले पर एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने मीडिया को जानकारी दी है कि राज्य कर विभाग की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने वाले नेटवर्क, रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजातों और आईटीसी ट्रांजेक्शन के सभी डिजिटल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है, ताकि इसमें संलिप्त अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।