बरेली। गणतंत्र दिवस के दिन बरेली में प्रशासनिक हलकों में हलचल उस वक्त तेज हो गई, जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के साथ जारी किए गए उनके बयान ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने वक्तव्य में व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बीते कुछ समय में सामने आई घटनाओं ने उन्हें अंदर तक आहत किया है। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ कथित मारपीट और अपमान की घटना का जिक्र करते हुए प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द और सम्मान की परंपरा के खिलाफ हैं। उनका आरोप है कि इस मामले में कार्रवाई के स्तर पर वह सख्ती नहीं दिखी, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित यूजीसी रेगुलेशंस 2026 को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन नियमों के जरिए सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव की आशंका बढ़ सकती है और इससे समाज में असंतोष की स्थिति बन सकती है।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों में आत्मसम्मान और जिम्मेदारी की भावना है, तो उन्हें भी समाज के साथ खड़े होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान हालात में सामान्य वर्ग खुद को केंद्र और राज्य सरकारों से अलग महसूस कर रहा है, जिससे स्थिति गंभीर होती जा रही है।
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि वे अब ऐसे तंत्र का हिस्सा नहीं रह सकते, जहां उन्हें न्याय और सम्मान की भावना कमजोर होती दिख रही है।
गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की है और वे विदेश में भी कार्य कर चुके हैं। गणतंत्र दिवस पर उनके इस्तीफे को प्रशासनिक सेवा के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और सामाजिक मुद्दों पर बढ़ते दबाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।

