आगरा: ताजनगरी में जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बजाज फाइनेंस लिमिटेड से फर्जी सैलरी स्लिप और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर 4.56 लाख रुपये का लोन डकार लिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस धोखाधड़ी का राज पूरे साढ़े चार साल (54 महीने) बाद तब खुला जब लोन की किस्तें आनी बंद हो गईं।
असली दस्तावेज, नकली चेहरा: ऐसे बुना जाल
इस जालसाजी का शिकार झारखंड का एक युवक हुआ है। जालसाजों ने उसके असली आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियों का इस्तेमाल किया, लेकिन उन पर फोटो किसी और व्यक्ति की चस्पा कर दी। इसके साथ ही फर्जी सैलरी स्लिप तैयार की गई ताकि लोन अप्रूवल में कोई अड़चन न आए।
किस्तें बंद हुई तो मचा हड़कंप
धोखेबाजों ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हुए शुरुआत में कुछ किस्तें समय पर जमा कीं, ताकि फाइनेंस कंपनी को शक न हो। लेकिन जैसे ही किस्तें रुकनी शुरू हुईं, कंपनी ने झारखंड स्थित युवक के पते पर रिकवरी के लिए संपर्क किया। वहां पहुँचने पर युवक ने लोन लेने की बात से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद कंपनी के होश उड़ गए।
जांच के घेरे में ‘अंदरूनी’ लोग?
कंपनी की आंतरिक जांच में दस्तावेजों में हेरफेर की पुष्टि होने के बाद, सहायक प्रबंधक ने थाना हरिपर्वत में अज्ञात जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर फोकस कर रही है:
लोन की राशि किस बैंक खाते में ट्रांसफर की गई?
शुरुआती किस्तों का भुगतान किस माध्यम से हुआ?
क्या इस फर्जीवाड़े में कंपनी का कोई कर्मचारी शामिल है?
पुलिस की कार्रवाई
थाना हरिपर्वत पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद ली है। बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल्स के जरिए असली आरोपियों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है।

