नोएडा/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा के फेज-2 में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुआ श्रमिकों का आंदोलन अब राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां एक ओर सड़कों पर पत्थरबाजी और आगजनी से अफरा-तफरी का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर योगी सरकार और भाजपा की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है।
हिंसा की आग और प्रशासनिक मुस्तैदी:
नोएडा फेज-2 की एक प्रमुख कंपनी के हजारों कर्मचारियों ने सोमवार को वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो उठा, जहां आक्रोशित भीड़ ने निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया। वाहनों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी, जिसके बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
अखिलेश यादव का तीखा हमला:
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर ‘पूंजीपति समर्थक’ होने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि नोएडा में भड़का यह उग्र आंदोलन भाजपा की उन एकतरफा नीतियों का नतीजा है, जो केवल बड़े उद्योगपतियों का भला करती हैं और सामान्य कर्मचारियों का शोषण।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “भाजपाई चंदा देने वाले पूंजीपतियों के एटीएम में तो पैसे भरते जा रहे हैं, लेकिन जब बात पसीना बहाने वाले श्रमिकों और मजदूरों के वेतन की आती है, तो इनके एटीएम खाली हो जाते हैं।”
महंगाई का उठाया मुद्दा:
सपा अध्यक्ष ने आम आदमी के दर्द को साझा करते हुए कहा कि आज के बेतहाशा महंगाई वाले दौर में कम वेतन में परिवार का गुजर-बसर करना कितना चुनौतीपूर्ण है, यह केवल एक परिवारवाला ही समझ सकता है। उन्होंने कर्मचारियों के आक्रोश को हवा देते हुए नारा दिया ‘वेतनभोगी कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!’
अखिलेश यादव के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि विपक्षी दल इस श्रमिक असंतोष को सरकार की आर्थिक विफलताओं के रूप में पेश करने की तैयारी में है। फिलहाल, नोएडा पुलिस अराजक तत्वों की पहचान करने में जुटी है, लेकिन इस घटना ने प्रदेश की औद्योगिक शांति और आर्थिक नीतियों पर नई बहस छेड़ दी है।

