लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सोमवार को विरोध प्रदर्शन की एक ऐसी हैरान कर देने वाली और विचलित करने वाली वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ रहे आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों का धैर्य अब पूरी तरह से जवाब दे चुका है।
इसी हताशा और आक्रोश में आज इन युवाओं ने सूबे में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और तपती सड़क के बीच पेट के बल रेंगते हुए (दंडवत करते हुए) बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास का घेराव किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
युवाओं के इस दयनीय और दर्दनाक प्रदर्शन का वीडियो वायरल होते ही सूबे की सियासत गरमा गई है और समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे लेकर सीधे राज्य सरकार पर तीखा निशाना साधा है।
“घमंड में चूर हैं भाजपाई” अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर कर साधा निशाना
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पीड़ित अभ्यर्थियों के इस रोंगटे खड़े कर देने वाले आंदोलन का वीडियो साझा किया है। वीडियो को पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने सीधे भारतीय जनता पार्टी और प्रदेश सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ”संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के अधिकार को मारने वाली भाजपा का अहंकार आज अंदर-ही-अंदर बहुत खुश होगा कि सदियों से वंचित, शोषित, पीड़ित समाज आज भी उनके वर्चस्व के आगे दंडवत होकर याचना कर रहा है। लेकिन अपने प्रभुत्व के घमंड में चूर भाजपाई और उनके संगी-साथी ये भी याद रखें कि जब आग्रह हार जाता है, तब इंसान सीमाएं लांघ जाता है।”
अखिलेश यादव का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार की घेराबंदी करने में पूरी ताकत से जुट गए हैं।
साल 2018 से शुरू हुआ था विवाद, जानें क्या है पूरा ‘महा आरक्षण’ पेंच
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि को समझें तो उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2018 में 69,000 सहायक शिक्षकों की इस बंपर भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया था। इस प्रक्रिया के तहत राज्य की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करने वाले हजारों योग्य उम्मीदवारों को आवेदन करने का अवसर मिला था। तय नियमों के आधार पर विभाग द्वारा मेरिट लिस्ट तैयार की गई और सफल पात्र उम्मीदवारों को प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्तियां भी दे दी गईं।
लेकिन, इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में पेंच और कानूनी विवाद तब फंसा, जब आरक्षित वर्ग के चयनित उम्मीदवारों ने फाइनल लिस्ट में विसंगतियों का दावा किया। ओबीसी और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि इस सूची को तैयार करने में राज्य की मूल आरक्षण नीति का घोर उल्लंघन किया गया है।
अभ्यर्थियों ने इसे ‘महा आरक्षण घोटाला’ का नाम देते हुए दावा किया कि उनकी हजारों सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को अवैध रूप से नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद से ही न्याय की मांग को लेकर यह पूरा मामला कोर्ट से लेकर लखनऊ की सड़कों पर लगातार सुलग रहा है।


