आगरा ट्रांसपोर्टर केस: एक्सीडेंट या मर्डर? जालौन की कार और बंद मोबाइल फोन ने पुलिस की उलझनों में किया इजाफा

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आगरा: ताजनगरी के खेरिया मोड़ पर ट्रांसपोर्टर असगर अली की जान लेने वाला हादसा अब एक गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। शुरुआती दौर में जिस मामले को आगरा पुलिस एक ‘साधारण एक्सीडेंट’ मानकर रफा-दफा करने की कोशिश में थी, अब नए सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों ने खाकी के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

वीडियो फुटेज ने पलटी पूरी कहानी

​खेरिया मोड़ से बरामद हुए नए वीडियो साक्ष्य इस केस की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए हैं। वीडियो में जिस तरह से घटना घटित हुई है, वह किसी इत्तेफाक से अधिक ‘नियोजित हमला’ जान पड़ता है। इसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने जालौन (UP 92) नंबर की उस संदिग्ध कार की पहचान कर ली है, जिसने असगर अली को अपनी चपेट में लिया था। कार का चालक फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

​GST अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी और फरारी

​मृतक के परिजनों ने इस मौत के पीछे सीधे तौर पर जीएसटी अधिकारी निवेदिता सिंह और उनके पति अजय सिंह पर आरोप जड़ा है। परिजनों का दावा है कि असगर अली को पहले भी जीएसटी विभाग की ओर से गंभीर धमकियां दी जा रही थीं।

​गायब हुए आरोपी: नामजदगी और आरोप लगने के बाद से ही निवेदिता सिंह और अजय सिंह ‘मेडिकल लीव’ या अवकाश का बहाना बनाकर गायब हैं।

​स्विच ऑफ मोबाइल: दोनों अधिकारियों सहित मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों के मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहे हैं, जिससे पुलिस की जांच की गति धीमी पड़ गई है।

परिजनों के संघर्ष से दर्ज हुई FIR

यह मामला आगरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। परिजनों के अनुसार, पुलिस शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने तक को तैयार नहीं थी। कई दिनों तक अधिकारियों की चौखट पर माथा टेकने और खुद साक्ष्य (वीडियो) जुटाने के बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

क्या यह ‘जीएसटी माफिया’ का काम है?

​शहर के ट्रांसपोर्ट हलकों में चर्चा है कि यह मामला महज व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि विभाग के अंदर चल रहे किसी बड़े सिंडिकेट से जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब कार चालक की गिरफ्तारी को प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि उसका बयान ही यह तय करेगा कि कार गलती से टकराई थी या उसे किसी के इशारे पर ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल किया गया था।