आगरा: किरावली तहसील में फरियादी की पिटाई करने वाला लेखपाल निलंबित, अब एफआईआर की मांग पर अड़े किसान

स्थानीय समाचार

आगरा। जनपद की किरावली तहसील में एक लेखपाल द्वारा फरियादी किसान की बेरहमी से पिटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रिश्वतखोरी और सरकारी गुंडागर्दी के इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए आरोपी लेखपाल वीरपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, पीड़ित किसान और किसान संगठनों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब मांग लेखपाल पर केवल निलंबन की नहीं, बल्कि मारपीट और भ्रष्टाचार के गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की है।

​क्या था पूरा मामला?

पीड़ित किसान के अनुसार, उसने अपने खेत की पैमाइश के लिए लेखपाल वीरपाल सिंह को ₹2500 की रिश्वत दी थी। लेखपाल ने एक खेत की नापतोल तो कर दी, लेकिन दूसरे खेत की पैमाइश करने से साफ इनकार कर दिया। जब किसान ने तर्क दिया कि उसने पूरी फीस (रिश्वत) दी है, तो लेखपाल वीरपाल सिंह आग-बबूला हो गया। आरोप है कि लेखपाल ने न केवल माँ-बहन की गालियाँ दीं, बल्कि किसान को कुर्सी से नीचे गिराकर लात-घूँसों से बुरी तरह पीटा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।

​भारतीय किसान यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी

घटना के बाद से क्षेत्र के किसानों में भारी रोष है। भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता बच्चू सिंह चौहान ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर आरोपी लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, तो वे किरावली तहसील का घेराव करेंगे और उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

​’हरिश्चंद्र’ बनने का ढोंग और योगी सरकार के दावों पर सवाल

किसान संगठनों ने सवाल उठाया है कि अक्सर लेखपाल किसानों पर ही ‘सरकारी काम में बाधा’ डालने का झूठा मुकदमा लिखवा देते हैं, लेकिन जब खुद लेखपाल रंगे हाथों रिश्वतखोरी और मारपीट में दोषी पाया जा रहा है, तो पुलिस उसके खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कर रही?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा दौरे से ठीक पहले सामने आई यह घटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। पीड़ित ने थाने में लिखित तहरीर भी दी है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस अपनी कार्यप्रणाली में निष्पक्षता दिखाते हुए रिश्वतखोर और गुंडागर्दी करने वाले लेखपाल पर एफआईआर दर्ज करती है, या मामला केवल विभागीय निलंबन तक ही सीमित रहेगा।