‘बंटवारे का दर्द’ के प्रीमियर शो में भावुक हुआ आगरा, परदे पर जीवित हुआ विभाजन का असह्य दंश, भारत माता के जयकारों से गूंजा हॉल

Entertainment

आगरा। इतिहास के गर्त में धुंधला पड़ा भारत विभाजन का भयावह अध्याय आज भी असंख्य दिलों में टीस बनकर जीवित है। मां के सामने लुटती बेटियों की अस्मत, जवान बेटे की लाश पर बिलखता विवश पिता, स्वाभिमान की रक्षा के लिए जिंदा बेटियों को कुओं में ढकेल देने या स्वयं तलवार से उनका सिर धड़ से अलग करने जैसी अमानवीय घटनाओं को जब परदे पर देखा गया, तो दर्शक भावुक हो उठे। आरए मूवीज की 65 मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बंटवारे का दर्द के प्रीमियर शो ने विभाजन की पीड़ा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर गहरी छाप छोड़ी।

संजय प्लेस स्थित अवध बैंकट हॉल में आयोजित प्रीमियर शो का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय द्वारा स्विच ऑन कर किया गया। कार्यक्रम स्थल भारत माता के जयकारों से गूंज उठा।

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि सिंधी, पंजाबी और सिख हमारे साझा पुरखे हैं, जिन्होंने विभाजन के समय जमींदारी और उद्योग तक गंवाकर खाली हाथ भारत की धरती पर कदम रखा, लेकिन अपने पुरुषार्थ से फिर खड़े हुए। युवाओं को सही इतिहास से अवगत कराने के लिए ‘बंटवारे का दर्द’ जैसी फिल्मों की अत्यंत आवश्यकता है।

कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि यह फिल्म अतीत की राजनीतिक भूलों की याद दिलाती है और बताती है कि कैसे खाकपति होकर आए सिंधी-पंजाबी समाज के लोगों ने परिश्रम से फिर समृद्धि अर्जित की।

फिल्म के निर्माता रंजीत सामा एवं विजय सामा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह फिल्म स्व. श्रीराजकुमार सामा, स्व. लालचंद डावर, स्व. कंवल नारायण खन्ना और स्व. ललिता अरोरा की प्रेरणा से बनी है। उद्देश्य यह है कि बंटवारे के दौरान झेले गए असह्य दर्द से आज की चौथी पीढ़ी को अवगत कराया जा सके। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को इस बात का अनुमान भी नहीं कि उनके पूर्वजों ने किन त्रासदियों का सामना किया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बंटवारे के दौरान भारत आए विस्थापितों की मदद में स्व. राजकुमार सामा ने अहम भूमिका निभाई। जूते और कपड़े के कारोबार के माध्यम से सहयोग कर अनेक परिवारों को पुनः बसाने का कार्य किया गया। फिल्म को दर्शकों से भरपूर सराहना मिली।

बंटवारे का दर्द झेलने वालों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के दौरान बंटवारे में पाकिस्तान बन चुके भारत के हिस्सों से खाली हाथ लौटे और आज शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों में शुमार पूरन डावर, रोचीराम नागनानी, अमरदेव साहनी, भीमसेन अरोरा, नारायण दास लालवानी, जयराम होतचंदानी, सरदार मंजीत सिंह, रानी सिंह, सुभाष मल्होत्रा, अनिल अरोड़ा, डॉ. रवि सभरवाल, राजेन्द्र शर्मा, राजकुमार भसीन, तिलकराज महाजन, हेमन्त भोजवानी, चंद्र सोनी, किशोर खन्ना सहित अनेक लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बसे-बसाए घर और व्यापार छोड़कर लौटे विस्थापितों के पास दर्द के सिवाय कुछ नहीं था। आज भले ही उन्होंने बेहतर मुकाम हासिल कर लिया हो, लेकिन जख्म आज भी हरे हैं।

फिल्म के सह-निर्माता अजय शर्मा और ब्रजेश शर्मा हैं। लेखक व निर्देशक राष्ट्रपति पदक विजेता हेमन्त वर्मा, संगीतकार रामशंकर जजवारे, गीतकार संजय दुबे तथा पार्श्व गायिका सुजाता शर्मा हैं।