रायपुर/बस्तर। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने छत्तीसगढ़ के संवेदनशील और कभी नक्सल प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में इस वर्ष देश के वीर जवानों के साथ दीपावली का पावन पर्व मनाया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को मिली ऐतिहासिक सफलता को देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि बताया और हमारे बहादुर सुरक्षा कर्मियों के साहस, त्याग तथा सर्वोच्च बलिदान की मुक्तकंठ से सराहना की।
पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद पर पूर्ण विजय प्राप्त करने के बाद यह देश की पहली दीपावली है, जो अपने आप में बेहद खास है। जवानों को पर्व की आत्मीय शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि जब देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, तब कोई भी बाहरी दुश्मन देश की ओर आँख उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता।
’ऐसे ही चलता रहेगा’ की मानसिकता से नहीं चलता देश
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब नक्सलियों के मारे जाने की तुलना में हमारे देश के अधिक संख्या में जवान शहीद होते थे और नक्सली संगठनों के मुखिया इसका जश्न मनाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकारों ने नक्सलवाद को एक ‘लाइसेंस प्राप्त लाइलाज बीमारी’ मानकर यह स्वीकार कर लिया था कि हालात ऐसे ही चलते रहेंगे।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि कोई भी राष्ट्र अपने दुश्मनों के सामने ऐसी कमजोर सोच और हार स्वीकार करने वाली मानसिकता के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। देश को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए मजबूत और दृढ़ इच्छाशक्ति का होना अनिवार्य है। उनके अनुसार, वर्ष 2014 के बाद देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को पूरी तरह दूर किया गया, जिसके परिणामस्वरूप धरातल पर सुरक्षा हालातों और आंकड़ों में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला।
सुरक्षा बलों को फैसलों की मिली पूरी छूट
प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत की सरकारों ने सुरक्षा बलों के हाथ पूरी तरह बांध रखे थे, जबकि उनकी सरकार ने आते ही जवानों को अपनी रणनीति बनाने और फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता प्रदान की। इसके साथ ही वामपंथी उग्रवाद को मिलने वाले वैचारिक, आर्थिक और रसद समर्थनों पर भी कड़े प्रहार किए गए।
उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल नाममात्र के लिए नक्सलवाद को खत्म करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि किसी माँ की गोद सूनी न हो और देश के किसी भी युवा का भविष्य आतंकवाद की भेंट न चढ़े। इसी दृढ़ संकल्प के साथ बिना किसी प्रचार या दिखावे के, पूरी संवेदनशीलता के साथ जमीनी स्तर पर काम किया गया और माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ दी गई।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों की एक ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए गर्व से कहा कि पिछले 47 वर्षों में यह पहला अवसर है जब एक वर्ष के भीतर सीआरपीएफ (CRPF) के किसी भी जवान को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी। उन्होंने इसे हमारे जवानों के अदम्य शौर्य, साहस, अनुशासन और संयम की सबसे बड़ी जीत करार दिया।
”आप सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं”
जवानों को अपने परिवार का हिस्सा बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपावली का पर्व अपने परिवार और अपनों के साथ मिलकर खुशियां बांटने का विशेष अवसर होता है। देश और दुनिया के अलग-अलग कोनों में भारतीय इस पर्व को मना रहे हैं, लेकिन वह देश के असली प्रहरियों के बीच आकर दिवाली मनाने के लिए विशेष रूप से बस्तर पहुंचे हैं।
बस्तर की पावन धरती का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कभी इसी क्षेत्र में नक्सलवाद का आतंक और भय का साया हुआ करता था, लेकिन हमारे वीर जवानों के त्याग और समर्पण के बूते अब यहाँ से नक्सलवाद का साया पूरी तरह समाप्त हो चुका है और इस अंचल में विकास तथा विश्वास की एक नई धारा बह रही है।
2026 की दिवाली को बताया ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार की यह दीपावली ऐतिहासिक है। दशकों से चले आ रहे माओवादी आतंक के खिलाफ निर्णायक जंग जीतने के बाद देश यह पर्व मना रहा है। उन्होंने इसे 40 से 50 वर्षों के अंतराल पर आई ऐसी अभूतपूर्व दिवाली बताया, जब देश का हर कोना और हर जिला नक्सलवाद के भय से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और करोड़ों देशवासियों को इस आतंक से हमेशा के लिए राहत मिल चुकी है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के माध्यम से देश को यह जानकारी दी थी कि वह अपने वीर सुरक्षाकर्मियों के साथ दीपावली मनाने के लिए बस्तर जा रहे हैं। उन्होंने जवानों के बलिदान, त्याग और तपस्या को नमन करते हुए उनके प्रति देश के अगाध प्रेम को व्यक्त किया था।

