आगरा कॉलेज में सात दिवसीय मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का समापन, विद्यार्थियों को मिला तनाव प्रबंधन का मूलमंत्र

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आगरा: ताजनगरी के ऐतिहासिक आगरा कॉलेज में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम श्रृंखला का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग, स्टूडेंट काउंसलिंग सपोर्ट सेंटर तथा सुसाइड प्रीवेंशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘स्टूडेंट सेमिनार’ में छात्र-छात्राओं को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, बेहतर जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।

​समापन सत्र को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर सी.के. गौतम ने कहा कि जीवन में किसी भी मुकाम को हासिल करने के लिए धैर्य, संयम और निरंतर प्रयास बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखते हुए अपने निर्धारित लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहना चाहिए। आज के दौर में जीवन की चुनौतियों और प्रतिस्पर्धा का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना और तनाव प्रबंधन सीखना अनिवार्य है।

​सकारात्मक परिवेश और संतुलित जीवनशैली है मानसिक सेहत की कुंजी

​कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर पूनम चांद ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि सात दिनों के दौरान मिली सीख को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि एक मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सटीक निर्णय लेने और समस्याओं का व्यावहारिक हल खोजने में अधिक सक्षम होता है।

​वहीं, प्रोफेसर अंशु चौहान ने मानसिक मजबूती के लिए सकारात्मक सोच और स्वस्थ सामाजिक वातावरण को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे हमेशा सकारात्मक सोच वाले लोगों के संपर्क में रहें और अपने आसपास परस्पर सहयोग का माहौल विकसित करें। प्रोफेसर दीपाली सिंह ने स्वस्थ मस्तिष्क के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त नींद को प्राथमिक जरूरत बताया। उन्होंने छात्रों को दूसरों से बेवजह तुलना करने की प्रवृत्ति छोड़कर अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।

फ्रायड के व्यक्तित्व सिद्धांत से समझाए मानसिक संतुलन के मायने

​तकनीकी सत्र में डॉ. रवि सिंह ने महान मनोवैज्ञानिक सिगमंड फ्रायड के प्रसिद्ध व्यक्तित्व सिद्धांत की व्याख्या करते हुए इड (Id), इगो (Ego) और सुपर ईगो (Superego) की अवधारणाओं को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि हमारी स्वाभाविक इच्छाओं, वास्तविक परिस्थितियों और सामाजिक-नैतिक मानदंडों के बीच सही संतुलन ही व्यक्ति के व्यवहार और व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा देता है।

​इसके अलावा, डॉ. अरविंद गुप्ता ने मानसिक तनाव के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी एक समस्या या विफलता के बारे में लगातार सोचते रहने से ओवरथिंकिंग (अत्यधिक चिंता) की स्थिति पैदा होती है। ऐसी स्थिति में नकारात्मक विचारों की पहचान करना, अनावश्यक चिंतन से बचना और समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि मानसिक परेशानी होने पर झिझकने के बजाय विशेषज्ञों से परामर्श और सहयोग लें।

सात दिनों तक चलीं विविध जागरूकता गतिविधियां

इस सात दिवसीय आयोजन श्रृंखला के दौरान कॉलेज परिसर में कई गतिविधियां आयोजित की गईं। इसमें ‘रिबन टाइंग’ का संयोजन प्रोफेसर अंशु चौहान, ‘जागरूकता रैली’ का संयोजन प्रोफेसर दीपाली सिंह, ‘विशेष व्याख्यान’ का संयोजन प्रोफेसर पूनम चांद, ‘कार्यशाला’ का संयोजन डॉ. अरविंद गुप्ता तथा ‘स्टूडेंट सेमिनार’ का संयोजन डॉ. रवि सिंह द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया।

​पूरे सप्ताह चले इस अभियान में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी व्यक्तिगत समस्याओं व भावनाओं को साझा किया। वक्ताओं ने एक सुर में संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य शैक्षणिक सफलता, सुखद जीवन और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का सबसे मजबूत आधार है। कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्राचार्य प्रो. सी.के. गौतम समेत सभी विभागों के प्रोफेसर, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।