नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा निकाले गए विरोध मार्च में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) की मौजूदगी ने सभी को चौंका दिया है। अब तक आधिकारिक तौर पर ‘इंडिया’ गठबंधन से दूरी बनाए रखने वाली बीजेडी के नेता इस मार्च में शामिल हुए, जिसे राजनीतिक गलितारों में एक बड़ा सरप्राइज माना जा रहा है।
आप और डीएमके रहीं मार्च से दूर
एक तरफ जहां बीजेडी की इस मार्च में एंट्री हुई, वहीं ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा रही एमके स्टालिन की पार्टी द्रमुक (डीएमके) और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई। हालांकि, इन दोनों ही दलों की ओर से यह सफाई दी गई है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के खिलाफ हैं और अपने-अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आप और डीएमके इन दिनों कांग्रेस पार्टी से थोड़ी दूरी बनाकर चलने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी राजनीतिक तल्खी देखने को मिली थी। वहीं दूसरी ओर, तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस ने पिछला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ते हुए अभिनेता से राजनेता बने सीएम विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था, जिसके बाद से दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थीं।
गौरतलब है कि इससे पहले 30 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगामी रणनीति तैयार करने के लिए बुलाई गई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से भी आप, डीएमके और बीजेडी तीनों ही दल दूर रहे थे।
जयराम रमेश ने एक्स पर साझा की जानकारी
कांग्रेस पार्टी के महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज चुनाव आयोग तक निकाले गए विरोध मार्च में ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद शामिल थे। इस मार्च को निर्वाचन सदन के पास आकाशवाणी भवन के ठीक सामने रोक लिया गया। इस प्रदर्शन में बीजेडी के सांसद भी शामिल हुए। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अन्य विपक्षी दल भी नैतिक रूप से इस मार्च के साथ थे, और वे दल भी जो फिलहाल कुछ समय के लिए एनडीए (NDA) का हिस्सा हैं।”
जयराम रमेश ने आगे तंज कसते हुए कहा, “चाहे वोट चोरी का मामला हो या परिसीमन का, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी के तमाम कुटिल मंसूबों को नाकाम करने के लिए विपक्ष की यह एकजुटता भविष्य में भी पूरी तरह कायम रहेगी। ‘भारतीय झूठ पार्टी’ की विदाई का वक्त आ चुका है और इसकी उलटी गिनती अब शुरू हो चुकी है।”
