आगरा सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में कैदी ने कसा फंदा: एनडीपीएस के मामले में 8 साल से बंद है आरोपी, प्रशासन ने बताया ‘आत्महत्या का नाटक’

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​आगरा। आगरा केंद्रीय कारागार की हाई सिक्योरिटी सेल में उस समय अफरातफरी मच गई, जब वहां बंद फिरोजाबाद के रहने वाले 28 वर्षीय बंदी बिलाल ने सोमवार सुबह दरी के धागे से फंदा लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बंदी को सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, बंदी बिलाल पिछले करीब आठ वर्षों से एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के मामले में केंद्रीय कारागार में बंद है। बताया जाता है कि बिलाल को नशे की लत है और वह जेल के भीतर भी अपने अनुचित आचरण व विवादों के चलते चर्चा में रहा है। हाल ही में बैरक के भीतर हंगामा करने और अन्य साथी बंदियों के साथ मारपीट की घटनाओं को अंजाम देने के बाद, जेल प्रशासन ने उसे सामान्य बैरक से हटाकर हाई सिक्योरिटी सेल में शिफ्ट किया था, जहां उस पर विशेष नजर रखी जा रही थी।

सोमवार सुबह करीब 11 बजे की घटना

प्राप्त विवरण के अनुसार, सोमवार सुबह लगभग 11 बजे बिलाल ने हाई सिक्योरिटी सेल के अंदर रखी दरी के धागे को निकालकर अपने गले में फंदा कसने का प्रयास किया। जैसे ही इसकी भनक जेल कर्मियों को लगी, अधिकारियों में खलबली मच गई। उसे तुरंत फंदे से उतारकर चिकित्सकीय सहायता दी गई और फिर बेहतर इलाज के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भेज दिया गया।

जेल प्रशासन का दावा— सेल से बाहर आने का था ड्रामा

इस पूरी घटना को लेकर जेल प्रशासन का एक अलग और चौंकाने वाला पक्ष सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि बंदी बिलाल ने हाई सिक्योरिटी सेल की पाबंदियों से परेशान होकर और वहां से बाहर निकलने के नापाक इरादे से आत्महत्या के प्रयास का यह नाटक रचा था।

फिलहाल, जेल प्रशासन इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहा है कि आखिर हाई सिक्योरिटी ज़ोन में इस तरह की सामग्री तक कैदी की पहुंच कैसे हुई और क्या सुरक्षा में कोई चूक हुई थी। जांच के आधार पर बंदी के खिलाफ सख्त जेल नियमों के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की निगरानी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।