Agra News: महिला इंजीनियर से छेड़छाड़ और उत्पीड़न केस में पूर्व जीएम को बड़ा झटका, 4 साल की सजा बरकरार

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आगरा। एक सर्जिकल मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनी के पूर्व जनरल मैनेजर (GM) संग्राम किशोर मलिक को जिला अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। महिला इंजीनियर से छेड़छाड़ और जबरन शारीरिक संबंध बनाने के प्रयास के मामले में, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-13) महेश चंद वर्मा ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने आरोपी को आदेश दिया है कि वह आगामी तीन दिनों के भीतर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करे।

पीड़िता के साथ बदसलूकी और धमकियां

मूल रूप से अमरोहा की रहने वाली पीड़िता 15 जून 2018 से उक्त कंपनी में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2020 से ही कंपनी के तत्कालीन जीएम संग्राम किशोर मलिक की नियत खराब थी। वह लगातार अभद्र व्यवहार करता था और जबरन शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाता था। महिला का कहना था कि विरोध करने पर आरोपी उसे जान से मारने की धमकियां देता था और अपनी पहुंच का रौब दिखाते हुए कहता था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

ऑफिस में की गई थी दरिंदगी

पीड़िता के अनुसार, 3 नवंबर 2021 को वह गेट पास पर हस्ताक्षर करवाने जीएम के कार्यालय गई थी। इसी दौरान आरोपी ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की और छेड़छाड़ की। यही नहीं, 31 जनवरी 2022 को भी आरोपी ने अपनी ओछी हरकतों को दोहराया। लगातार मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न से तंग आकर पीड़िता ने एत्मादद्दौला थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था, जिसके बाद वह जेल गया और फिर जमानत पर बाहर आ गया।

नौकरी से निकाला और सुलह का बनाया दबाव

मामले की आंतरिक जांच के बाद कंपनी ने संग्राम किशोर मलिक को बर्खास्त कर दिया था। हालांकि, बाद में एक अजीब स्थिति बनी, जहाँ पीड़िता उसी कंपनी में फिर से कार्यरत रही और आरोपी भी दोबारा जीएम के पद पर बहाल हो गया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उस पर लगातार मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया। जब वह समझौता करने के लिए राजी नहीं हुई, तो कंपनी के साथ मिलकर उसे भी नौकरी से बाहर निकलवा दिया गया।

निचली अदालत का फैसला और सजा

पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने 30 अगस्त 2024 को संग्राम किशोर मलिक को दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई थी धारा 354 4 वर्ष का कारावास और ₹4,000 जुर्माना, धारा 354A 2 वर्ष 6 माह का कारावास और ₹2,500 जुर्माना, ​धारा 342: 6 माह का कारावास और ₹500 जुर्माना, धारा 504: 1 वर्ष का कारावास और ₹2,000 जुर्माना, धारा 506: 2 वर्ष का कारावास और ₹2,000 जुर्माना।

​सजा मिलने के बाद आरोपी ने जिला अदालत में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। एडीजे-13 ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत का निर्णय पूरी तरह से तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित था, जिसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।