आगरा। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता और लोधी राजपूत समाज के प्रभावशाली चेहरे रहे मिश्रीलाल राजपूत एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में कानूनी शिकंजे में आ गए हैं। आईसीआईसीआई बैंक ने हरीपर्वत थाने में मिश्रीलाल राजपूत समेत तीन लोगों के खिलाफ 1.06 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले ने राजनीतिक और बैंकिंग गलियारों में हलचल मचा दी है।
फर्जी दस्तावेजों से लोन का खेल
बैंक द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी सेल डीड और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक को गुमराह किया। बैंक से पहले 78 लाख रुपये का होम लोन और बाद में उसी संपत्ति पर 15 लाख रुपये का टॉप-अप लोन हासिल किया गया। आरोपियों में मिश्रीलाल राजपूत के साथ बैंककर्मी प्रियंका श्रीवास्तव और अंकुश श्रीवास्तव के नाम भी शामिल हैं।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
बैंक अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी 2024 तक लोन की ईएमआई (EMI) का भुगतान नियमित रूप से होता रहा, लेकिन इसके बाद भुगतान अचानक रुक गया। बैंक ने जब आंतरिक जांच (Internal Audit) शुरू की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस संपत्ति को गिरवी रखकर बैंक से करोड़ों का लोन लिया गया था, वह संपत्ति पहले से ही किसी अन्य बैंक के पास बंधक थी। बैंक का आरोप है कि आरोपियों ने इस अहम तथ्य को जानबूझकर छिपाया और फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की।
ब्याज के साथ बढ़ी देनदारी
बैंक का दावा है कि स्वीकृत लोन की मूल राशि करीब 93 लाख रुपये थी, लेकिन समय पर भुगतान न होने और उस पर लगे भारी-भरकम ब्याज के कारण अब कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग 1.06 करोड़ रुपये हो गई है। बैंक ने इस वित्तीय धांधली को गंभीरता से लेते हुए हरीपर्वत थाने में तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस की कार्रवाई जारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर साक्ष्यों का संकलन शुरू कर दिया गया है। फिलहाल, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के विवादित दस्तावेजों और अन्य सबूतों की गहन पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


