आगरा। शहर के सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सार्वजनिक उद्यान पालीवाल पार्क में एक ऐसी विदेशी प्रजाति की मौजूदगी सामने आई है, जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक आक्रामक जीव प्रजातियों में गिना जाता है। पर्यावरण प्रेमी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन द्वारा पार्क में विशाल अफ्रीकी घोंघे (जायंट अफ्रीकन लैंड स्नेल) के दो जीवित नमूने देखे जाने के बाद पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और संबंधित विभागों की चिंता बढ़ गई है।
पालीवाल पार्क के यमुना गेट से प्रवेश करने के बाद पैदल मार्ग के समीप भ्रमण के दौरान अधिवक्ता के.सी. जैन की नजर इन विशालकाय घोंघों पर पड़ी। उन्होंने तत्काल उनके फोटोग्राफ लिए और विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी तथा उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर इन्हें जायंट अफ्रीकन लैंड स्नेल (लिस्साचाटिना फुलिका) प्रजाति का बताया। यह प्रजाति मूल रूप से अफ्रीका की है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई राज्यों में तेजी से फैल चुकी है।
अधिवक्ता जैन के अनुसार यह घोंघा अत्यंत तीव्र गति से प्रजनन करने वाली प्रजाति है, जो उद्यानों, नर्सरियों, कृषि क्षेत्रों और प्राकृतिक वनस्पतियों को व्यापक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है। यह पौधों की कोमल पत्तियों, फूलों, सब्जियों और नव विकसित वनस्पतियों को नष्ट कर देता है, जिससे स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। यदि समय रहते इसकी संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पालीवाल पार्क सहित शहर के अन्य हरित क्षेत्रों में भी इसका प्रसार हो सकता है।
के.सी. जैन ने कहा कि पालीवाल पार्क केवल एक उद्यान नहीं बल्कि आगरा की महत्वपूर्ण पर्यावरणीय धरोहर है। यहां प्रतिदिन हजारों नागरिक, बच्चे, वरिष्ठजन, मॉर्निंग वॉकर्स और प्रकृति प्रेमी आते हैं। पार्क में अनेक दुर्लभ और स्थानीय पौधों के साथ समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। ऐसे में किसी विदेशी आक्रामक प्रजाति की उपस्थिति को सामान्य घटना मानना भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट को आमंत्रित करने जैसा होगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों के हवाले से जैन ने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जायंट अफ्रीकन लैंड स्नेल कुछ प्रकार के परजीवियों का वाहक हो सकता है। ऐसे में नागरिकों को इन घोंघों को नंगे हाथों से छूने से बचना चाहिए। यदि कहीं इस प्रकार के घोंघे दिखाई दें तो तत्काल संबंधित विभाग या प्रशासन को सूचना दें।
अधिवक्ता के.सी. जैन ने वन विभाग, उद्यान विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि पालीवाल पार्क एवं आसपास के क्षेत्रों का तत्काल वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। यह पता लगाया जाए कि यह विदेशी प्रजाति कितनी संख्या में मौजूद है और इसका प्रसार किस स्तर तक पहुंच चुका है। आवश्यकता पड़ने पर इसके नियंत्रण और उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पार्क कर्मचारियों और आम नागरिकों को इस प्रजाति की पहचान, उसके दुष्प्रभावों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी विदेशी आक्रामक प्रजाति की निगरानी के लिए नियमित और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।
के.सी. जैन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है। स्थानीय जैव विविधता को बाहरी और आक्रामक प्रजातियों से सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। पालीवाल पार्क जैसे महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र में इस विदेशी घोंघे की मौजूदगी एक चेतावनी है, जिस पर समय रहते गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है, अन्यथा भविष्य में इसके दुष्परिणाम और अधिक व्यापक रूप में सामने आ सकते हैं।


