यूपी में गरमाया जातिगत पोस्टर वॉर: सपा ने जारी की राजभर समाज की 22 हत्याओं की सूची, ओम प्रकाश राजभर का तीखा पलटवार

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जातिगत समीकरणों और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चरम पर है। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग अब “पोस्टर वॉर” के रूप में सड़कों पर उतर आई है। हाल ही में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर द्वारा सपा पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए समाजवादी पार्टी ने एक विवादित पोस्टर जारी किया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

सपा कार्यालय के बाहर लगाए गए इस पोस्टर में वर्ष 2024 से 2026 के बीच राजभर समाज के 22 लोगों की हत्याओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। समाजवादी पार्टी युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज राजभर द्वारा लगवाए गए इस पोस्टर में जनपदवार हत्याओं की सूची साझा की गई है।

आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में 6, बलिया, गाजीपुर और मऊ में 3-3, जौनपुर में 2, तथा बाराबंकी, कुशीनगर और संतकबीर नगर में 1-1 व्यक्ति की हत्या का जिक्र है।

​पोस्टर में दी गई जनपदवार सूची:

​वाराणसी: सुरेश, फया, छोटू, डॉ. सचिन, इंजि. रोहित और फत्ते राजभर।

बलिया: दिग्विजय, चंदन और विक्की राजभर।

गाजीपुर: शिवमूरत, दीपक और सुधारन राजभर।

मऊ: अमित, अनिल, शिवबचन, सुनील और सुरेश राजभर।

जौनपुर: पंकज और डॉ. सुनील राजभर।

अन्य: बबलू (बाराबंकी), रिंकी (कुशीनगर) और नंदिनी (संतकबीर नगर)।

इस पोस्टर ने राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे महज एक प्रोपेगेंडा करार दिया है। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनौती देते हुए कहा, “बैनर लगाने वालों को केवल नाम और संख्या नहीं बतानी चाहिए, बल्कि हत्या के असली दोषियों की पहचान भी स्पष्ट करनी चाहिए।”

उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बाराबंकी जैसी घटनाओं में जब सपा से जुड़े लोग शामिल होते हैं, तो वे अपनी जाति क्यों नहीं बताते? उन्होंने पोस्टर लगाने वालों को “सपा के चमचे” बताते हुए कहा कि वे इस बात का जवाब दें कि इन हत्याओं में हत्यारे किस जाति के थे।

​गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश के कई जिलों में सपा के विरुद्ध भी पोस्टर लगाए गए थे, जिसके बाद यह जवाबी कार्रवाई सामने आई है। यूपी में जाति आधारित राजनीति का यह बढ़ता प्रभाव अब सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को नए राजनीतिक धरातल पर ले आया है। पुलिस प्रशासन के लिए भी इस पोस्टर वॉर के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखना एक नई चुनौती बन गया है।